Madhubani News : जन्म के पहले सप्ताह में नवजात की मौत का 73 फीसदी खतरा

नवजात के जन्म के बाद पहले 28 दिन उसके जीवन व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है.

मधुबनी. नवजात के जन्म के बाद पहले 28 दिन उसके जीवन व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है. बचपन के किसी अन्य अवधि की तुलना में नवजात की मृत्यु की संभावना इस दौरान अधिक रहती है. इसलिए कहा जाता है कि नवजात के जीवन का पहला महीना आजीवन उसके स्वास्थ्य व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है. शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में विशेष अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है. भारत में अभी 1000 नवजातों में 19 की मौत हो रही है. जबकि बिहार में यह आंकड़ा 18 है. केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर को घटाकर 12 प्रति 1000 नवजात का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव व एनएचएम के मिशन डायरेक्टर आराधना पटनायक ने सभी राज्यों के एसीएस को पत्र भेजा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार नवजातों की मृत्यु का लगभग 73 प्रतिशत खतरा जन्म के पहले सप्ताह में ही होता है. इसमें ज्यादातर मामले अल्प वजन और समय से पूर्व जन्म के कारण होता है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से फैसिलिटी बेस्ड न्यू बॉर्न केयर के अद्यतन परिचालन, दिशा निर्देश, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम पर प्रशिक्षण मॉड्यूल, माता और देखभाल कर्ताओं को छोटे और बीमार नवजात की पोषण व देखभाल में सक्षम बनाने के लिए माड्यूल तैयार किया गया है. इसमें नवीनतम वैज्ञानिक प्रमाण तकनीक और बेहतरीन प्रथाओं को शामिल किया गया है. विशेष रूप से मदर न्यूनेटल केयर यूनिट की स्थापना, कंगारू मदर केयर को बढ़ावा, ऑक्सीजन और सी-पैप के विवेकपूर्ण उपयोग और अस्पताल प्रवास के दौरान मां व नवजात की सुरक्षित देखभाल पर जोर दिया गया है. यह संसाधन नेशनल न्यू बाॅर्न वीक 2025 के दौरान जारी किया जाएगा. 15 से 21 नवंबर तक नेशनल न्यू वन वीक का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के द्वारा 15 से 21 नवंबर तक नेशनल न्यू बोर्न वीक मनाया जाएगा. इसमें प्रसव के बाद देखभाल, स्तनपान, कंगारू मदर केयर और नवजात सुरक्षा पर जिला अस्पताल से लेकर उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर तक फोकस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसमें एसएनसीयू और प्रसूति वार्ड की विशेष समीक्षा, डॉक्टरों और व नसों का रिफ्रेशर प्रशिक्षण, कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा, समुदाय व प्रसव के बाद माता के बीच जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे. जागरूकता से नवजात मृत्यु के मामलों में कमी संभव नवजात सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि जन्म के पहले 28 दिनों में नवजात मृत्यु के अधिकांश मामले होते हैं. हाल के वर्षों में नवजात मृत्यु दर के मामलों में कमी आयी है. वर्ष 2019-20 में जारी एनएफएचएस 5 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में नवजात मृत्यु दर शहरी क्षेत्र में 27.9 व ग्रामीण इलाके में 35.2 के करीब है. इसके लिए जोखिम के कारणों की पहचान एवं उचित प्रबंधन नवजात मृत्यु दर के मामलों को कम करने के लिये जरूरी है. नवजात के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रति व्यापक जागरूकता जरूरी है. स्वच्छता, टीकाकरण व उचित पोषण जरूरी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल आनंद यादव ने कहा कि प्री-मैच्योरिटी, प्री-टर्म, संक्रमण व जन्मजात विकृतियां नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है. नवजात के स्वस्थ जीवन में नियमित टीकाकरण, स्वच्छता संबंधी मामलों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. जन्म के एक घंटे बाद नवजात को मां का गाढ़ा पीला दूध का सेवन जरूर करानी चाहिए. उचित पोषण के लिये छह माह तक मां के दूध के अलावा किसी अन्य चीज के उपयोग से परहेज करनी चाहिए. बच्चों के वृद्धि व विकास को बढ़ावा देने के लिये उचित पोषण महत्वपूर्ण है.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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