माहे रमजान का तीसरा अशरा आज से शुरू, इबादत व दुआओं में जुटे रोजेदार

माहे रमजान का तीसरा अशरा आज से शुरू, इबादत व दुआओं में जुटे रोजेदार

उदाकिशुनगंज .

माहे रमजान का तीसरा अशरा आज से शुरू हो रहा है. इसे जहन्नम से निजात का अशरा कहा जाता है. इस अशरे में रोजेदार अधिक से अधिक इबादत, तिलावत, दुआ और तौबा-इस्तिगफार में मशगूल रहते हैं. बताते हैं कि रमजान के आखिरी 10 दिनों का खास महत्व है. इन दिनों में शबे-कद्र भी आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर रात माना गया है. इसलिए मस्जिदों में इबादत करने वालों की संख्या बढ़ जाती है. मौलाना इस्माइल अनवर सिद्दीकी ने कहा कि माहे रमजान के तीसरे अशरे में अल्लाह अपने बंदों को जहन्नम की आग से निजात अता फरमाता है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि रमजान के इन आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा नेक काम करें, जरूरतमंदों की मदद करें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें. साथ ही समाज में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ करें. मौलाना इस्माइल अनवर सिद्दीकी ने माहे रमजान के आखिरी अशरे में एतेकाफ की खास अहमियत और फजीलत बतायी. उन्होंने कहा कि इस दौरान मुसलमान मस्जिद में रहकर पूरी तरह इबादत, तिलावत-ए-कुरान, जिक्र और दुआ में समय बिताते हैं. उन्होंने कहा कि एतेकाफ का मकसद दुनिया के कामों से दूर होकर अल्लाह की इबादत में पूरी तरह मशगूल होना है. रमजान माह के अंतिम दस दिनों में एतेकाफ बैठना सुन्नत माना गया है. इस दौरान एतेकाफ में बैठने वाला व्यक्ति मस्जिद में ही रहता है और ज्यादा से ज्यादा इबादत करता है. और इसी अशरे में शबे-कद्र की मुबारक रात भी आती है, जो हजार महीनों की इबादत से बेहतर बतायी गयी है. मौलाना इस्माइल अनवर सिद्दीकी ने बताया कि एतेकाफ करने वाला व्यक्ति दुनियावी कामों से अलग होकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगता है और समाज में अमन-चैन व खुशहाली की दुआ करता है. इसलिए रमजान के आखिरी दिनों में मस्जिदों में एतेकाफ में बैठने वालों की संख्या बढ़ जाती है.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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