बिहार में नशा तस्करी का बदलता चेहरा, कैरियर बन तस्करों से इस्तेमाल हो रही महिलाएं

बिहार में नशा तस्करी का बदलता चेहरा, कैरियर बन तस्करों से इस्तेमाल हो रही महिलाएं

जिन महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए की गयी थी शराबबंदी, वही महिलाएं शराब तस्करी में आ रही आगे मधेपुरा. बिहार के आंगन से जब शराबबंदी की मांग उठी थी, तब उसमें एक दर्द था. वह दर्द था एक मां का, एक पत्नी का और एक बेटी का, जिसका घर नशे की भेंट चढ़ रहा था. सरकार ने उनकी पुकार सुनी और कानून लागू किया, लेकिन आज के हालात देखकर यह सवाल खड़ा होता है कि क्या वही ””””””””ढाल”””””””” अब ””””””””तलवार”””””””” बन रही है. हाल की घटनाएं बताती हैं कि शराब व मादक पदार्थों की तस्करी में महिलाओं की संलिप्तता तेजी से बढ़ी है, जो न केवल कानून के लिए चुनौती है बल्कि सामाजिक नैतिकता पर भी एक गहरा आघात है. अपराध की दहलीज पर महिलाएं : पांच कड़वे सच (केस स्टडी) घर बना गांजे का गोदाम : गम्हरिया के बभनी वार्ड नंबर 13 में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया. थानाध्यक्ष राघव शरण की टीम ने गुप्त सूचना पर छापेमारी की और पम्मी देवी नामक महिला को गिरफ्तार किया. उसके पास से 600 ग्राम गांजा बरामद हुआ. एक महिला का अपने ही घर को नशे की मंडी बनाना समाज के लिए चिंता का विषय है. मानपुर में शराब की होम डिलीवरी गम्हरिया थाना क्षेत्र के ही मानपुर गांव में अखिलेश सदा की पत्नी मंजू देवी घर के भीतर देसी शराब बेचते पकड़ी गयी. पुलिस ने 15 लीटर चुलाई शराब बरामद की. यह दिखाता है कि गरीबी या लालच की आड़ में महिलाएं इस दलदल में कैसे धंस रही हैं. घोरमहा की शर्मनाक तस्वीर पुलिस की छापेमारी में घोरमहा निवासी सतन सदा की पत्नी प्रमिला देवी को शराब बेचते रंगे हाथों पकड़ा गया. यह मामला साबित करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शराबबंदी के बावजूद महिलाएं पर्दे के पीछे से इस अवैध नेटवर्क को मजबूती दे रही हैं. रेलवे की जमीन पर अवैध ठिकाना सदर थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर पिंकी देवी और ललिता देवी ने रेलवे की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से घर बनाया, लेकिन उनका मकसद छत पाना नहीं, बल्कि अवैध शराब का अड्डा चलाना था. लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार कानून के हाथ उन तक पहुंच ही गये. आलमनगर में महुआ का नशा: आलमनगर के बसनवाड़ा पंचायत (चमरु बासा) से मीना देवी की गिरफ्तारी हुई, जिसके पास से 10 लीटर महुआ शराब बरामद हुई. सामाजिक भावना और विडंबना यह विडंबनापूर्ण है कि शराबबंदी का सबसे बड़ा ””””””””वोट बैंक”””””””” और ””””””””लाभार्थी”””””””” मानी जाने वाली महिलाएं अब खुद तस्करों की भूमिका में हैं. इसके पीछे कई सामाजिक व आर्थिक कारण हो सकते हैं. कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाहत महिलाओं को इस अपराध की ओर धकेल रही है. अक्सर पुलिस महिलाओं पर कम शक करती है, जिसका फायदा माफिया उठा रहे हैं. वे महिलाओं को ””””””””कैरियर”””””””” या ””””””””फ्रंट”””””””” के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. समाज की वह इकाई जो संस्कारों की जननी मानी जाती है, जब वही नशे के कारोबार में शामिल होती है, तो पूरी पीढ़ी के पथभ्रष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है. समाज करे आत्ममंथन शराबबंदी को सफल बनाने का जिम्मा केवल सरकार या पुलिस का नहीं है, जिस महिला शक्ति के सम्मान के लिए यह अभियान शुरू हुआ, यदि वही इसके खिलाफ खड़ी हो जायेगी, तो सामाजिक ताना-बाना बिखर जायेगा. इन गिरफ्तारियों ने समाज को आइना दिखाया है कि नशा केवल पीने वाले को ही नहीं, बल्कि इसे बेचने वाले के चरित्र को भी खत्म कर देता है. अब समय है कि समाज आत्ममंथन करे और इन ””””””””घर की तस्करों”””””””” के खिलाफ एक सामूहिक चेतना जगाए.

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Author: GUNJAN THAKUR

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