Freedom Fighter Tribute : गमैल पंचायत में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनानी की सुपुत्री धर्मपरायण सरस्वती देवी ने की, जबकि संचालन योगेंद्र नारायण सिंह ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत स्व. सुखदेव प्रसाद सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. इसके बाद उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए.
युवाओं को दिए राष्ट्रभक्ति और सेवा के संदेश
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी का अमृत हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी, सामाजिक समरसता और जनसेवा की भावना को अपनाकर उनके सपनों के भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए.
स्वतंत्रता संग्राम में निभाई थी अहम भूमिका
वक्ताओं ने बताया कि स्व. सुखदेव प्रसाद सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी से घबराकर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम तक घोषित कर दिया था. स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था, जो पूरे क्षेत्र के लिए आज भी गर्व का विषय है.
समाज सेवा और विकास कार्यों की रही अलग पहचान
स्वतंत्रता के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर समाज सेवा को अपना उद्देश्य बनाया. पूर्व मुखिया, जिला पंचायत परिषद के अध्यक्ष तथा जिला कांग्रेस कमिटी, सहरसा के महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने गरीब, वंचित और शोषित वर्ग के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य किया. ग्रामीणों ने कहा कि उनके द्वारा कराए गए विकास कार्य आज भी लोगों के बीच मिसाल बने हुए हैं.
धार्मिक पुस्तकों और वस्त्रों का हुआ वितरण
पुण्यतिथि के अवसर पर बड़ी संख्या में मानस प्रेमी, समाजसेवी और ग्रामीण उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान सरस्वती देवी ने श्रद्धालुओं के बीच अंगवस्त्र और धार्मिक पुस्तकों का वितरण किया. वहीं जरूरतमंद लोगों को वस्त्र और मिठाइयां भी वितरित की गईं. कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की.
