उदाकिशुनगंज ( मधेपुरा ) : सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के साथ बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान दिया जाए तो विद्यालय की तस्वीर बदल सकती है. उदाकिशुनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय परिहारपुर में प्रधान शिक्षक कुमार किशोर केशरी की पहल इसका उदाहरण बनकर सामने आयी है. विद्यालय परिसर में वर्षों से खाली पड़ी जमीन को अनुपयोगी छोड़ने के बजाय पोषण वाटिका के रूप में विकसित किया गया है. यहां उगायी जा रही हरी सब्जियों का इस्तेमाल बच्चों के मध्यान्ह भोजन में किया जा रहा है.
विद्यालय परिसर में इन दिनों लौकी, करेला, कद्दू, झींगा सहित कई प्रकार की सब्जियां लहलहा रही हैं. बेल वाली सब्जियों को बांस का सहारा देकर व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया है. इससे एक ओर विद्यालय परिसर की सुंदरता बढ़ी है, वहीं बच्चों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां भी मिल रही हैं.
खाली जमीन को बनाया उपयोगी
प्रधान शिक्षक कुमार किशोर केशरी ने विद्यालय की खाली जमीन का उपयोग करने की योजना बनायी. इसके बाद सीमित संसाधनों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री की मदद से पोषण वाटिका तैयार की गयी. धीरे-धीरे यह वाटिका विद्यालय की पहचान बनती जा रही है.
खेत से सीधे बच्चों की थाली तक पहुंच रही सब्जी
इस पहल की खास बात यह है कि विद्यालय परिसर में तैयार होने वाली सब्जियों को बच्चों के मध्यान्ह भोजन में शामिल किया जा रहा है. जिस जमीन पर पहले कुछ नहीं होता था, उसी जमीन पर उगी सब्जियां अब बच्चों की थाली तक पहुंच रही हैं. इससे बच्चों को ताजी हरी सब्जियों का लाभ मिल रहा है और पोषण वाटिका का उद्देश्य भी पूरा हो रहा है.
बच्चों के लिए बनी व्यावहारिक पाठशाला
पोषण वाटिका सिर्फ सब्जी उत्पादन तक सीमित नहीं है. यह बच्चों के लिए खेती, पर्यावरण और पोषण की व्यावहारिक पाठशाला भी बन रही है. बच्चे पौधों को बढ़ते हुए देखते हैं और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी हासिल करते हैं. इससे उनमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति लगाव बढ़ रहा है.
बच्चों का स्वास्थ्य और पोषण प्राथमिकता : प्रधान शिक्षक
प्रधान शिक्षक कुमार किशोर केशरी ने बताया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखना भी जरूरी है. विद्यालय परिसर में खाली पड़ी जमीन को देखकर विचार आया कि इसका इस्तेमाल बच्चों के हित में किया जाए. इसी सोच के साथ पोषण वाटिका तैयार की गयी. इसमें मौसम के अनुसार अलग-अलग हरी सब्जियां लगायी जाती हैं और तैयार सब्जियों का उपयोग मध्यान्ह भोजन में किया जाता है.
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केवल सब्जियां उगाना नहीं, बल्कि बच्चों को खेती, पोषण और पर्यावरण से जोड़ना भी है. बच्चे जब विद्यालय परिसर में सब्जियां उगते देखते हैं तो उनमें पौधों की देखभाल और खेती के प्रति रुचि पैदा होती है.
अन्य विद्यालयों के लिए भी बन सकती है मिसाल
विद्यालय में उपलब्ध सीमित संसाधनों के बीच शुरू की गयी इस पहल को सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में जमीन और अन्य संसाधन उपलब्ध होते हैं, लेकिन उनका बेहतर उपयोग नहीं हो पाता. परिहारपुर विद्यालय में खाली जमीन को पोषण वाटिका में बदलकर बच्चों के पोषण से जोड़ना अनुकरणीय पहल है.
यदि जिले के अन्य विद्यालय भी अपने परिसर की खाली जमीन का इसी तरह उपयोग करें तो विद्यालयों में हरियाली बढ़ाने के साथ बच्चों को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है. यह पहल प्रखंड से लेकर जिले के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा बन सकती है.
