Madhepura News: मधेपुरा जिले के मुरलीगंज नगर पंचायत में प्रस्तावित एसटीपी-कम-एफएसटीपी (STP-cum-FSTP) परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है. वार्ड संख्या 12 के स्थानीय भूस्वामियों और ग्रामीणों ने रिहायशी इलाके के बीच संयंत्र स्थापित करने का विरोध करते हुए भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया शुरू करने से पहले पूरे प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है. 50 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा है, जबकि इसी आशय का आवेदन अंचलाधिकारी और जिलाधिकारी को भी डाक के माध्यम से भेजा गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि वे स्वच्छ भारत मिशन या स्वच्छता संबंधी योजनाओं के विरोधी नहीं हैं. उनकी आपत्ति केवल उस स्थान को लेकर है, जहां यह संयंत्र प्रस्तावित किया गया है. उनका तर्क है कि यदि भविष्य में संयंत्र के संचालन या रखरखाव में तकनीकी समस्या आती है, तो इसका सीधा असर आसपास के घरों, स्कूलों, मंदिरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा.
रिहायशी क्षेत्र के बीच संयंत्र पर उठे सवाल
ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार प्रस्तावित स्थल के आसपास लगभग 100 से 150 मीटर की दूरी पर कई रिहायशी मकान मौजूद हैं.
करीब 100 मीटर के दायरे में दो विद्यालय, एक मंदिर, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी स्थित हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट और फीकल स्लज ट्रीटमेंट संयंत्र स्थापित करना भविष्य में गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याएं पैदा कर सकता है.
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने का भी दिया हवाला
स्थानीय नागरिकों ने यह भी बताया कि यह इलाका हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है.
उनके अनुसार बरसात के मौसम में यहां लगभग तीन फीट तक पानी जमा हो जाता है. ऐसे में यदि संयंत्र का संचालन बाधित हुआ या रखरखाव में कमी आई, तो दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप, शोर-शराबा और स्लज ढोने वाले वाहनों की आवाजाही से पूरे क्षेत्र की जीवनचर्या प्रभावित हो सकती है.
तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने नगर पंचायत से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं.
उन्होंने जानना चाहा है कि स्थल का चयन किन तकनीकी मानकों के आधार पर किया गया, क्या अन्य वैकल्पिक स्थलों का सर्वेक्षण हुआ था, और यदि हुआ तो उन्हें किन कारणों से अस्वीकार किया गया.
इसके साथ ही उन्होंने परियोजना की डीपीआर, साइट चयन रिपोर्ट, ले-आउट प्लान, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति, भूजल संरक्षण योजना, दुर्गंध नियंत्रण प्रणाली और ग्रीन बेल्ट योजना जैसे दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है.
खुली जनसुनवाई की भी मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थानीय नागरिकों के साथ खुली बैठक या जनसुनवाई आयोजित करने का आग्रह किया है.
उनका कहना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट से पहले प्रभावित लोगों की राय सुनना और आवश्यक होने पर स्थल परिवर्तन पर गंभीरता से विचार करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए.
स्थानीय लोगों ने क्या कहा
वार्ड संख्या 12 निवासी दिलीप कुमार ने कहा कि केंद्र और बिहार सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना स्वागत योग्य है, लेकिन इसका निर्माण घनी आबादी से दूर होना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि 2008 की कुशाहा त्रासदी के बाद बेंगा नदी का प्रवाह लगभग समाप्त हो चुका है. ऐसे में यहां एफएसटीपी स्थापित होने से भविष्य में भूमिगत जल प्रदूषित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
सोशल एक्टिविस्ट विकास शर्मा ने सुझाव दिया कि एसटीपी और एफएसटीपी प्लांट शहर की घनी आबादी से कम से कम एक किलोमीटर दूर स्थापित किया जाना चाहिए.
वार्ड पार्षद शैलेंद्र कुमार ने कहा कि यदि भविष्य में संयंत्र में तकनीकी खराबी आती है, तो उसका असर केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे शहर को प्रभावित कर सकता है.
उपमुख्य पार्षद श्यामा आनंद ने कहा कि सबसे पहले मृतप्राय बेंगा नदी का पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. वहीं सेवानिवृत्त प्राध्यापक एनपी यादव ने सवाल उठाया कि जब शहर की अधिकांश नालियां आपस में जुड़ी ही नहीं हैं, तो अलग-अलग वार्डों का दूषित जल प्रस्तावित एसटीपी तक कैसे पहुंचेगा.
Madhepura News: नगर पंचायत का पक्ष
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी अजय कुमार ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य शहर के दूषित जल को बिना उपचार के नदी में जाने से रोकना है.
उन्होंने बताया कि सभी वार्डों से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से नालियों का पानी एसटीपी तक लाया जाएगा, जहां उसका वैज्ञानिक तरीके से शुद्धीकरण किया जाएगा. इसी प्रकार सेप्टिक टैंकों से निकाले जाने वाले मल-कीचड़ को विशेष वाहनों के जरिए एफएसटीपी तक लाकर उपचारित किया जाएगा.
कार्यपालक पदाधिकारी के अनुसार प्रस्तावित स्थल का चयन बिहार सरकार द्वारा नामित एजेंसी ने सैटेलाइट मैपिंग के आधार पर किया है. जिलाधिकारी भी स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं और लगभग 368.085 डिसमिल भूमि क्रय की प्रक्रिया चल रही है.
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जा रहा है. अब तक तीन बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और यदि आवश्यक हुआ तो एक और बैठक कर सभी शंकाओं का समाधान किया जाएगा. उनका दावा है कि संयंत्र पूरी तरह बाउंड्रीवाल से घिरा होगा और आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास के क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.
