Physiotherapy Benefits: दर्द, चोट या किसी बीमारी के बाद शरीर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो जाएं तो हर बार दवा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती. चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी भी शारीरिक क्षमता और गतिशीलता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. दुर्घटना, चोट, ऑपरेशन या लंबे समय तक बीमारी के बाद शरीर को फिर से सामान्य गतिविधियों में लाने में फिजियोथेरेपी काफी उपयोगी साबित हो सकती है.
इसी विषय को लेकर मुरलीगंज-बिहारीगंज स्टेट हाईवे-91 स्थित कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पवन कुमार एवं फिजियोथेरेपी विभाग की अध्यक्ष निशु कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
दुर्घटना और चोट के बाद शरीर को फिर सक्रिय करने में मदद
कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉ. निशा गुप्ता ने फिजियोथेरेपी की उपयोगिता और वर्तमान समय में इसकी बढ़ती आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी शारीरिक गतिविधियों, व्यायाम और विभिन्न चिकित्सकीय तकनीकों के माध्यम से मरीज की शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है.
उन्होंने कहा कि दर्द और गतिशीलता से जुड़ी समस्याओं को कम करने के साथ शरीर की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखने में भी फिजियोथेरेपी की भूमिका महत्वपूर्ण है. दुर्घटना या चोट के बाद मरीज को दोबारा सामान्य गतिविधियों में लौटने में पुनर्वास की जरूरत होती है. ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी उपयोगी हो सकती है.
विशेषज्ञों के अनुसार मांसपेशियों, जोड़ों, नसों और हड्डियों से जुड़ी कई समस्याओं में भी फिजियोथेरेपी का इस्तेमाल उपचार और पुनर्वास के हिस्से के रूप में किया जाता है. हालांकि, फिजियोथेरेपी किस मरीज को कितनी और किस प्रकार करनी है, यह उसकी समस्या और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करता है.
सिर्फ दर्द होने पर ही फिजियोथेरेपी जरूरी नहीं
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि फिजियोथेरेपी को केवल दर्द होने की स्थिति तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए. सही चिकित्सकीय सलाह के साथ नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकती है.
छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय लोगों को भी इस दौरान फिजियोथेरेपी से जुड़ी जानकारी और परामर्श दिया गया. लोगों को शारीरिक समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और समस्या के अनुसार उचित उपचार एवं पुनर्वास प्रक्रिया अपनाने के प्रति जागरूक किया गया.
कार्यक्रम का उद्देश्य फिजियोथेरेपी को लेकर लोगों के बीच मौजूद सामान्य भ्रांतियों को दूर करना और इसके चिकित्सकीय महत्व की जानकारी देना भी रहा.
गीत, नृत्य और नाटक से दिया स्वास्थ्य का संदेश
जागरूकता कार्यक्रम के बाद छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी संदेश दिए.
छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मनोरंजन किया और स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश को सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाया. कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थियों के साथ शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी, अभिभावक और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे.
Physiotherapy Benefits: बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी हुए सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रस्तुतियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया. इससे विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और उन्हें आगे भी सामाजिक एवं स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया.
आयोजन को सफल बनाने में संस्थान के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मियों और छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
कार्यक्रम में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पवन कुमार, डॉ. निशा गुप्ता, पैरामेडिकल प्रिंसिपल डॉ. विशाखा जायसवाल, डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. कुमारी नेहा, सुरेंद्र नकेला, नर्सिंग प्रिंसिपल सोनी कुमारी, दिलखुश कुमार, भावना जायसवाल, सपना कुमारी, गौतम कुमार, शुभम कुमार, मणि रत्नम कुमार सहित संस्थान के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी मौजूद थे.
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