आलमनगर में ई-फार्मेसी के खिलाफ दवा दुकानदारों ने निकाला मार्च, सिर्फ एक दुकान को मिली इमरजेंसी सेवा की अनुमति

ऑनलाइन दवा बिक्री और बड़े कॉरपोरेट घरानों की मनमानी के खिलाफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के देशव्यापी आह्वान पर मधेपुरा जिले के आलमनगर में दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं. बंदी को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए दवा व्यवसायियों ने बाजार में विरोध मार्च निकाला और हुंकार भरी.

आलमनगर (मधेपुरा) से ब्रजेश की रिपोर्ट:

अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में निकला मार्च, बीडीओ और चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

आलमनगर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को प्रखंड क्षेत्र के सभी दवा दुकानदारों ने एकजुटता दिखाई. बंदी के समर्थन में व्यवसायियों ने मुख्य बाजार में एक विशाल विरोध मार्च निकाला और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की.

इस दौरान संगठन के अध्यक्ष पंकज चौधरी और सचिव विकास सिंह ने बताया कि देशव्यापी बंदी के तहत आलमनगर प्रखंड की सभी छोटी-बड़ी दवा दुकानें पूर्णतः बंद रहीं. आंदोलन के दौरान आम जनता और मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए संगठन द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. इसके तहत आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं के लिए मुख्य बाजार स्थित ‘श्री श्याम मेडिकोज’ को खुला रखा गया, ताकि किसी मरीज की जान पर न बन आए. इस व्यवस्था और बंदी की लिखित जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और प्रखंड स्वास्थ्य पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दे दी गई है.

ऑनलाइन दवाओं की आसान पहुंच से जन स्वास्थ्य और रोगी सुरक्षा को बड़ा खतरा

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा व्यापार) के तकनीकी और सामाजिक खतरों को उजागर करते हुए कहा कि यह व्यवस्था देश के जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा टाइम बम साबित हो रही है. उन्होंने विरोध के निम्नलिखित मुख्य बिंदु रेखांकित किए:

  • फर्जी और असत्यापित पर्चे: ऑनलाइन पोर्टल्स पर बिना किसी कड़े वेरिफिकेशन के फर्जी पर्चों के आधार पर दवाएं बुक हो रही हैं.
  • नशीली व प्रतिबंधित दवाएं: युवाओं और असामाजिक तत्वों तक नशीली दवाओं और हेवी एंटीबायोटिक्स की पहुंच बेहद आसान हो गई है, जिससे ‘ड्रग एब्यूज’ बढ़ रहा है.
  • संवाद का अभाव: ई-फार्मेसी में फार्मासिस्ट और रोगी के बीच सीधा कोई संवाद नहीं होता, जिससे गलत दवा खाने का जोखिम रहता है.
  • नकली दवाओं का खतरा: ऑनलाइन सप्लाई चेन में नकली या अशुद्ध (अमानक) जीवन रक्षक दवाओं के खपने की आशंका अत्यधिक बनी रहती है.

कॉरपोरेट की मनमानी से 5 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट

सचिव विकास सिंह ने आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बड़े-बड़े कॉरपोरेट घराने अपनी असीमित पूंजी के बल पर बाजार का संतुलन बिगाड़ रहे हैं. नियमों को ताक पर रखकर दी जा रही अनियमित भारी छूट (डिस्काउंट) के कारण पीढ़ियों से पारंपरिक दुकान चला रहे छोटे और मध्यम केमिस्टों के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा है. इस खुदरा दवा व्यापार से देश भर के लगभग 5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है, जो इस नीति के कारण पूरी तरह प्रभावित हो रही है.

अधिसूचना वापस लेने की मांग, मार्च में ये व्यवसायी रहे शामिल

दवा व्यवसायियों की सरकार से प्रमुख मांग है कि ई-फार्मेसी को बढ़ावा देने वाली सभी सरकारी अधिसूचनाओं को तुरंत वापस लिया जाए और अवैध तरीके से चल रहे ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म्स पर पूर्णतः सख्त प्रतिबंध लगाया जाए. जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, दवा दुकानदारों का यह कड़ा रुख जारी रहेगा.

इस सफल बंदी, मार्च और विरोध प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, अभिमन्यु सिंह, सचिव विकास कुमार सिंह, नंदलाल ठाकुर, धीरज सिंह, मुकेश सुरेका, भूदेव कुमार, पप्पू सिंह, नन्दन झा, भुपेन्द्र कुमार और प्रदीप कुमार सहित आलमनगर प्रखंड के सभी प्रतिष्ठित दवा दुकानदार और फार्मासिस्ट मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

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Published by: Divyanshu Prashant

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