Shivkumar Prasad Yadav: मधेपुरा के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रख्यात विज्ञान शिक्षक स्व. शिवकुमार प्रसाद यादव की 89वीं जयंती समारोहपूर्वक मनायी गयी. शहर में आयोजित समारोह में शिक्षाविदों, शिक्षकों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके योगदान को याद किया और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया.
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी-साहित्यकार प्रो. डॉ. भूपेन्द्र नारायण यादव 'मधेपुरी' ने की, जबकि उद्घाटन बीएनएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. आरकेपी रमण ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत स्व. शिवकुमार प्रसाद यादव एवं करुणा देवी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी.
शिक्षा के प्रति समर्पण को किया याद
बीएनएमयू के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. आरकेपी रमण ने कहा कि शिवकुमार बाबू ने मधेपुरा की शैक्षणिक धरातल को सींचने का काम किया और घर-घर शिक्षा का दीपक जलाया. उन्होंने कहा कि स्व. यादव अपने कार्य के प्रति समर्पित योगी की तरह थे. उनकी अनुशासनप्रियता और समयबद्धता आज के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अनुकरणीय है.
समारोह के दौरान शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अवकाशप्राप्त शिक्षक अमरेंद्र यादव को सम्मानित किया गया. ट्रस्ट की सचिव प्रो. रीता कुमारी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. स्वागताध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. नरेश कुमार रहे, जबकि पार्वती विज्ञान महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. डॉ. आलोक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
शिक्षाविदों ने साझा किए विचार
समारोह को लाल बहादुर, प्रो. डॉ. नीलकांत, प्रो. डॉ. अशोक कुमार यादव, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जयप्रकाश यादव, प्रो. डॉ. अशोक कुमार, नवल कुमार, प्रो. विवेक कुमार, डॉ. बीके यादव और आण्विका यादव ने भी संबोधित किया. वक्ताओं ने स्व. शिवकुमार प्रसाद यादव के व्यक्तित्व और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया.
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं. अरुण कुमार बच्चन, उमेश राम और रोशन कुमार ने प्रस्तुति दी. तबले पर डॉ. रवि रंजन कुमार और अजय कुमार ने संगत की. मंच संचालन सेवानिवृत्त शिक्षक मणिभूषण वर्मा ने किया.
Shivkumar Prasad Yadav: शिक्षा और अनुशासन की विरासत को किया याद
जयंती समारोह में वक्ताओं ने स्व. शिवकुमार प्रसाद यादव के शैक्षणिक योगदान के साथ उनके अनुशासन और समयबद्ध कार्यशैली को भी याद किया. समारोह का उद्देश्य उनके योगदान को स्मरण करने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उनके मूल्यों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाना भी रहा.
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