Saurabh Kumar Bharti DU Professor: मधेपुरा के युवा डॉ सौरभ कुमार भारती ने दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर जिले का नाम रोशन किया है. वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों में शामिल हैं. उनकी इस उपलब्धि के पीछे कड़ी मेहनत, लगातार अध्ययन और परिवार के संघर्ष की कहानी भी जुड़ी है.
सौरभ के पिता स्व. श्यामल प्रसाद यादव मिडिल स्कूल के प्रधानाध्यापक थे. पिता के निधन के बाद उनकी मां नूतन देवी ने अकेले सौरभ की परवरिश की. मां के संघर्ष और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर सौरभ ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उपलब्धियां हासिल कीं.
मालदा से शुरू हुई पढ़ाई, दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंचा सफर
सौरभ की प्रारंभिक शिक्षा मालदा के इमैनुएल इंग्लिश स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की. पढ़ाई के दौरान उन्होंने अकादमिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनायी.
सौरभ ने पहले ही प्रयास में नेट-जेआरएफ की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल बिजनेस में पीएचडी पूरी की. शोध के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया और वर्ल्ड बैंक के साथ शोध करने का अवसर हासिल किया.
प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं शोधपत्र
डॉ सौरभ कुमार भारती के कई शोधपत्र प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. उनके अकादमिक काम को दिल्ली विश्वविद्यालय में भी सम्मान मिला. उन्हें इकोनॉमिक्स कैटेगरी में बेस्ट रिसर्च अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ते हुए अब दिल्ली विश्वविद्यालय में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनकी नियुक्ति हुई है. उनकी उपलब्धि से मधेपुरा के शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
मां और मामा को दिया सफलता का श्रेय
सौरभ ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां नूतन देवी और मामा प्रवीण कुमार पप्पू, कटहरवा, बुधमा को दिया है. पिता के निधन के बाद मां ने जिस तरह अकेले उनकी परवरिश की, वह उनके जीवन संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.
पैतृक गांव घोघनपट्टी में भी उनकी उपलब्धि पर खुशी का माहौल है. चाचा अरुण भारती सहित ग्रामीणों ने सौरभ की सफलता पर प्रसन्नता जतायी है. परिवार वर्तमान में जयपालपट्टी वार्ड 15 में रहता है.
Saurabh Kumar Bharti DU Professor: बहन भी डीयू में कर रही पढ़ाई
सौरभ की बहन सिमरन भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रही हैं. परिवार में शिक्षा के प्रति इस जुड़ाव के बीच सौरभ की उपलब्धि को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
डॉ सौरभ का लक्ष्य अब अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाने के साथ मधेपुरा के छात्रों के लिए भी काम करना है. वे भविष्य में जिले के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में योगदान देना चाहते हैं.
Also Read: बिहार में बाढ़ ने रोकी बिहार के बच्चों की पढ़ाई, कहीं स्कूल डूबे तो कहीं रास्ते बने बाधा
Also Read: बिहार में बाढ़ से 40 लाख से ज्यादा लोग खतरे में, 14 जिलों में स्थिति गंभीर, उफान पर नदियां
