Madhepura News : मालिकों की गलतियां भुगत रहे वाहन... थाने में सड़ रहीं दर्जनों जब्त गाड़ियां

मधेपुरा के उदाकिशुनगंज आदर्श थाना परिसर में दर्जनों गाड़ियां जब्त पड़ी हैं. इन पर घास उग आयी है. इन वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया नहीं हो रही है. जबकि कई मामलों में कोर्ट के फैसले का इंतजार है.

Madhepura News : कोनेन बशीर, उदाकिशुनगंज. उदाकिशुनगंज थाना में जब्त मोटरसाइकिल व अन्य वाहन नीलामी के अभाव में सड़ रहे हैं. इन पर अब मिट्टी व घास भी जमने लगी है. वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो थाना परिसर में ही खड़ा किया जाता है. लेकिन रखरखाव के अभाव में थाना परिसर में वाहन सड़ रहे हैं. जाहिर है कि ऐसे वाहन पूरी तरह असुरक्षित होते हैं. सैकड़ों ऐसे वाहन हैं जो वाहन मालिक के इंतजार में अब कबाड़ के लायक भी नहीं रह गये हैं. लावारिस वाहनों को एक निश्चित समय सीमा के बाद नीलाम करने का प्रावधान रहा है. लेकिन नीलामी नहीं होने की वजह से थाने में रखे वाहन कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं. वहीं कुछ लोग न्यायालय के आदेश से अपना वाहन वापस ले जाते हैं. लेकिन बेनामी और लावारिस वाहन जंग खाने के लिए खड़े रह जाते हैं. थाना परिसर में जब्त वाहनों की संख्या काफी अधिक हो गयी है. दर्जनों गाड़ियां ऐसी हैं जो 20 से 25 वर्षों से थाना परिसर में पड़ी हुई हैं. इसके चलते वाहनों के इर्द गिर्द पेड़-पौधे उग आये हैं. वाहन झाड़ियों के कब्जे में हैं. धूप व बरसात के कारण वाहन खराब हो रहे हैं. वाहनों में दो पहिया वाहनों की संख्या अधिक है. तेज धूप और बरसात में अधिकांश वाहन सड़ चुके हैं, जिन्हें कौड़ी के मोल भी नहीं बेचा जा सकता है.

थाने में बर्बाद हो रहे वाहन

अनुमंडल के विभिन्न थानों में पुलिस द्वारा अभियान चलाकर वाहनों को पकड़ा जाता है. लगातार इसकी संख्या में इजाफा हो रहा है. वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण थाना पूर्ण रूप से कबाड़ खाना की शक्ल ले चुका है. विषैले जीव जंतु निवास करने लगे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, अनुमंडल के विभिन्न थानों में लगभग एक हजार से अधिक मोटरसाइकिल जब्त की गयी है. जबकि इसके अलावा बड़े वाहन भी हैं. वही हर थाने में दर्जनों मोटर साइकिल, कारें और ट्रक कोर्ट में चल रहे मामलों में फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

क्षेत्र में रोजाना होते हैं कई एक्सीडेंट

मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में रोजाना कई एक्सीडेंट होते रहते हैं. कई केस में तो ड्राइवर पब्लिक के गुस्से से बचने के लिए गाड़ीछोड़कर भाग जाते हैं. पुलिस के लफड़े से बचने के लिए ज्यादातर गाड़ी मालिक गाड़ी के लिए क्लेम नहीं करते हैं. सालों से थानों में खड़ी ऐसी गाड़ियों की भरमार है.

कई चोरी, तो कई अन्य मामलों में जब्त हैं गाड़ियां

जब्त वाहनों में कुछ चोरी की है, तो कुछ दुर्घटना में जब्त किये हैं. कुछ ऐसे वाहन हैं जिसका अवैध सामान की तस्करी में प्रयोग किया गया है. पुलिस ने उसे जब्त किया है. पुलिस द्वारा जब्त किये गये वाहनों को छुड़ाने के लिए होने वाली लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए लोग वाहनों को नहीं छुड़ाते हैं. क्योंकि ऐसे अधिकांश वाहन होते हैं, जिनका न तो टैक्स जमा रहता है नहीं अन्य कागजात रहते हैं. कारण लोग लंबी प्रकिया व अधिक खर्च के कारण वाहन छुड़ाना मुनासिब नहीं समझते हैं.

कहते हैं थानाध्यक्ष

नीलामी की प्रक्रिया जिले से की जाती है. उसी के तहत वाहनों को नीलाम कर उससे प्राप्त राजस्व सरकारी कोष में जमा होते हैं.जब तक जिले से नीलामी का गजट प्रकाशित नहीं होगा. तब तक वाहन थाने में ही जब्त पड़ारहेगा.
-विनोद कुमार सिंह, थानाध्यक्ष, उदाकिशुनगंज

थानाध्यक्षों को करनी चाहिए अनुशंसा : डीएसपी

अनुमंडल क्षेत्र के सभी थानों में वाहनों की स्थिति यह है कि नीलामी नहीं होने के कारण ये खराब हो रहे हैं. सभी संबंधित थाने के थानाध्यक्ष द्वारा जब्त वाहनों की नीलमी के लिए अनुशंसा की जानी चाहिए. जल्द ही इसके लिए सभी थानों में जब्त वाहनों की सूची बनाकर इसकी नीलामी के लिए अनुशंसा की जायेगी.
-अविनाश कुमार, डीएसपी

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Author: Sugam

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