मुख्य बातें:
मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
Madhepura Nagar Parishad Garbage Management: बिहार के कोसी क्षेत्र अंतर्गत मधेपुरा जिला मुख्यालय की शहरी साफ-सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है. हालत यह है कि शहर के लगभग हर छोटे-बड़े चौक-चौराहे पर कचरे का विशाल अंबार लगा हुआ है. मुख्य व्यावसायिक बाजारों से लेकर शहर के रिहायशी गली-मोहल्लों तक में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो चुका है. खासकर शहर के हृदयस्थल माने जाने वाले सुभाष चौक और पूर्णिया गोला जैसे अति-व्यस्ततम स्थानों पर हालात बद से बदतर बने हुए हैं, जहां रोजाना हजारों लोगों और वीआईपी वाहनों का आवागमन होता है. स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन की इस लचर कार्यशैली के खिलाफ कड़ा जन-आक्रोश व्यक्त किया है.
सुभाष चौक और पूर्णिया गोला में नरक जैसी स्थिति
- सुभाष चौक की बदहाली: शहर का सबसे प्रमुख और व्यस्त व्यापारिक केंद्र होने के बावजूद यहां सड़कों के किनारे कई दिनों से कचरा डंप पड़ा है. दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाला अपशिष्ट नियमित रूप से न उठाए जाने के कारण सड़ रहा है, जिससे उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण राहगीरों को नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ रहा है.
- पूर्णिया गोला का संकट: इस क्षेत्र में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक है. बाजार के मुहाने पर ही सड़ी-गली सब्जियां, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य दूषित अपशिष्ट खुले में बिखरे पड़े हैं. हवा के साथ यह कचरा मुख्य सड़क पर फैल रहा है, जिससे आए दिन बाइक सवार फिसलकर चोटिल हो रहे हैं.
“टैक्स पूरा, सफाई अधूरी”— दुकानदारों का फूटा गुस्सा
नगर प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की विसंगतियों को लेकर स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में भारी नाराजगी है.
व्यापारियों का कहना है कि नगर परिषद केवल कागजों पर ही विशेष सफाई अभियान और फॉगिंग की कड़ियां चलाता है. धरातल पर सफाई कर्मियों की नियमित उपस्थिति शून्य के बराबर है. हम लोग हर महीने नगर निकाय को विधिवत टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में हमें सिर्फ व्यापार घाटा और दुकान के आगे सड़ांध मिलती है. बगल का पूर्णिया जिला हमेशा स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आता है, लेकिन हमारे मधेपुरा को अधिकारी कचरा डंपिंग यार्ड बनाकर छोड़ चुके हैं.
ओवरफ्लो हुए डस्टबिन, शहर पर मंडराया महामारी का खतरा
अस्पताल रोड, कॉलेज चौक, स्टेशन रोड और विभिन्न वार्डों की गलियों की जमीनी कड़ियों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि शहर में ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) पूरी तरह फेल हो चुका है.
नगर परिषद द्वारा लाखों की लागत से खरीदे गए आधुनिक डस्टबिन या तो टूट चुके हैं या कचरे से पूरी तरह ओवरफ्लो होकर सड़कों पर पलट चुके हैं. डस्टबिन खाली न होने के कारण लोग मजबूरी में उसके आसपास ही कचरा फेंकने को विवश हैं.
चिकित्सकों ने दी बड़ी चेतावनी: फैल सकता है डेंगू और हैजा
स्थानीय चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस गंभीर विसंगति पर गहरी चिंता जताई है. डॉक्टरों के अनुसार, उमस और आगामी बरसात के मौसम में इन सड़ते हुए कचरे के ढेरों में मच्छरों, मक्खियों और घातक जीवाणुओं का पनपना तेज हो गया है.
यदि अगले ४८ घंटों के भीतर नगर परिषद के सफाई अमले ने मुख्य डंपिंग साइट्स को साफ नहीं किया, तो शहर में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और हैजा जैसी जानलेवा संक्रामक बीमारियां महामारी (Epidemic) का रूप ले सकती हैं.
पटना: NEET Re-Exam में सॉल्वर गैंग को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया.
Madhepura Nagar Parishad Garbage Management: जवाबदेही तय करने और नियमित गश्ती की मांग
शहर की सुंदरता और स्वच्छता को बचाने के लिए अब स्थानीय सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी (DM) से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है. नागरिकों का कहना है कि जब तक वार्ड वार सफाई जमादारों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी और कचरा उठाने वाले वाहनों की डिजिटल मॉनिटरिंग नहीं होगी, तब तक मधेपुरा को इस नरकीय स्थिति से मुक्ति नहीं मिल सकती. आम जनता ने भी अपील की है कि लोग भी जागरूक होकर खुले में कचरा फेंकने से परहेज करें ताकि सामूहिक प्रयास से शहर को स्वच्छ बनाया जा सके.
