Madhepura News: मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड की मोरसंडा पंचायत में सरकारी नाला निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. चंदा कबीर टोला वार्ड संख्या-1 में निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल और विभागीय मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है. ग्रामीणों का दावा है कि विरोध के बाद निर्माण स्थल से कच्ची ईंटें हटाकर दूसरी श्रेणी की पक्की ईंटें लगाई गईं, लेकिन अब भी कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है.
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित अनिवार्य सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है. इससे लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि योजना किस विभाग से स्वीकृत हुई है, इसकी लागत कितनी है और निर्माण कार्य किस एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है.
ग्रामीणों ने लगाए गुणवत्ता से समझौते के आरोप
स्थानीय ग्रामीण इम्तियाज आलम, जसीम, इस्ताक, गुलशन खातून, मकसूद आलम समेत अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि शुरुआत में नाला निर्माण में कच्ची ईंटों का उपयोग किया जा रहा था.
उनका कहना है कि जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो निर्माण स्थल से कच्ची ईंटें हटाई गईं और उनकी जगह दूसरी श्रेणी की पक्की ईंटें लगाकर निर्माण कार्य फिर शुरू कर दिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अब भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है.
सूचना बोर्ड नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी सरकारी निर्माण योजना में सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य होता है, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, लंबाई, कार्य एजेंसी और अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज रहती हैं.
लेकिन इस योजना में अब तक कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है. इससे ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
मुखिया बोले- योजना की जानकारी नहीं
जब इस संबंध में पंचायत के मुखिया शेखर पासवान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यह योजना किस मद से स्वीकृत हुई है.
उन्होंने कहा, "फिलहाल 15वीं वित्त आयोग की योजना खुलने वाली है. उसी से काम करा देंगे, नहीं तो मनरेगा से व्यवस्था कर ली जाएगी."
मुखिया के इस बयान के बाद योजना की प्रशासनिक जानकारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
जेई ने बताया किस योजना से हो रहा निर्माण
मामले पर जूनियर इंजीनियर शंकर कुमार ने बताया कि नाला निर्माण कार्य षष्ठम वित्त आयोग योजना के तहत कराया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इस योजना की प्राक्कलित लागत ₹4 लाख 24 हजार है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि निर्माण स्थल पर अभी तक सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है और आश्वासन दिया कि जल्द ही बोर्ड मंगवाकर लगा दिया जाएगा.
Madhepura News: जांच और पारदर्शिता की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराया जाए और योजना से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं.
ग्रामीणों का मानना है कि सूचना बोर्ड लगाए जाने और नियमित निगरानी से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी.
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