Madhepura News: मधेपुरा में गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को एनीमिया (रक्ताल्पता) से बचाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है. जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से सदर अस्पताल के सभागार में खंड परामर्शदाताओं के लिए जिला स्तरीय रक्ताल्पता पाठ्यक्रम प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाना और रक्ताल्पता मुक्त भारत अभियान को और प्रभावी बनाना है.
प्रखंड स्तर तक पहुंचेगा प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन की अध्यक्षता में आयोजित किया गया. इसमें जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम समन्वयक, जिला गुणवत्ता आश्वासन सलाहकार और पिरामल स्वास्थ्य की टीम के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रशिक्षण प्राप्त खंड परामर्शदाता अब अपने-अपने प्रखंडों में सहायक नर्स दाई (ANM) और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को रक्ताल्पता पाठ्यक्रम पर प्रशिक्षण देंगे. इससे गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समय पर पहचान और उपचार की व्यवस्था मजबूत होगी.
एनीमिया की पहचान और उपचार पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को गर्भावस्था में रक्ताल्पता की पहचान, रोकथाम, उपचार, रक्ताल्पता मुक्त भारत कार्यक्रम, अंकीय रक्तवर्णमापी यंत्र (डिजिटल हीमोग्लोबिन मीटर) के उपयोग, व्यवहार परिवर्तन संचार और माता एवं शिशु स्वास्थ्य पर एनीमिया के प्रभाव जैसे विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई.
सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक अभ्यास भी कराया गया ताकि स्वास्थ्य कर्मी अपने क्षेत्र में प्रशिक्षण को प्रभावी तरीके से लागू कर सकें.
विशेषज्ञों ने किया तकनीकी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण का संचालन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बिनोद कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक मुकेश कुमार सिंह, गंगाधर, दीप्ति बेसरा, संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों और डॉ. विकास कुमार ने संयुक्त रूप से किया.
विशेषज्ञों ने तकनीकी और व्यवहारिक दोनों पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया.
सिविल सर्जन ने बताई एनीमिया रोकथाम की अहमियत
अपने संबोधन में सिविल सर्जन ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता की समय पर पहचान, उचित उपचार और नियमित अनुवर्तन माता एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
उन्होंने सभी खंड परामर्शदाताओं से अपील की कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने-अपने प्रखंडों में प्रभावी ढंग से करें और रक्ताल्पता मुक्त भारत अभियान को गति दें.
सभी प्रखंडों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागी शिक्षण, समूह चर्चा, प्रश्नोत्तरी, स्थिति आधारित चर्चा और अंकीय रक्तवर्णमापी यंत्र का व्यवहारिक प्रदर्शन भी कराया गया.
मधेपुरा जिले के सभी प्रखंडों के खंड परामर्शदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रशिक्षण को उपयोगी बताया. स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में एनीमिया की पहचान और उपचार की व्यवस्था और मजबूत होगी.
