प्रशासनिक दावों की निकली हवा: सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहीं प्रतिबंधित "जुगाड़ गाड़ियां", हादसों का बढ़ा खतरा

जिले में प्रतिबंधित 'जुगाड़ गाड़ियों' का अवैध संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा है. ये वाहन बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिससे आम राहगीरों और यात्रियों की जान खतरे में है. प्रशासनिक कार्रवाई में ढिलाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

जिले में प्रशासन और परिवहन विभाग के कड़े रुख के बावजूद प्रतिबंधित “जुगाड़ गाड़ियों” (स्थानीय स्तर पर निर्मित अवैध वाहन) का अवैध संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा है. शहर के मुख्य बाजारों से लेकर ग्रामीण इलाकों की सड़कों तक हर दिन दर्जनों जुगाड़ गाड़ियां धड़ल्ले से फर्राटा भरती नजर आ रही हैं. बिना किसी सुरक्षा मानक, पंजीकरण (Registration) और बीमा (Insurance) के दौड़ रहे ये वाहन न केवल यातायात नियमों की खुली धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आम राहगीरों और यात्रियों की जान के लिए भी "चलता-फिरता खतरा" साबित हो रहे हैं.

क्या होती हैं 'जुगाड़ गाड़ियां'?

आमतौर पर पुरानी मोटरसाइकिल के इंजन, ट्रैक्टर के पुर्जों या डीजल पंपसेट के इंजनों को जोड़कर यह अनधिकृत वाहन तैयार किए जाते हैं:

  • मानकों का अभाव: इन वाहनों में न तो सही ब्रेक सिस्टम होता है और न ही हेडलाइट, इंडिकेटर या सुरक्षा उपकरण.
  • सड़क पर बेखौफ दौड़: इसके बावजूद इनका इस्तेमाल भारी सामान ढोने और सवारियां ढोने के लिए खुलेआम किया जा रहा है.

प्रशासनिक आदेश पड़े बेअसर, ठंडा पड़ा जब्ती अभियान

कुछ समय पूर्व जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए ज़ब्ती और भारी जुर्माने की चेतावनी जारी की थी:

  • कार्रवाई में ढिलाई: शुरुआत में कुछ दिनों तक सघन चेकिंग अभियान चलाकर गाड़ियां जब्त की गईं, लेकिन समय के साथ प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह ठंडी पड़ गई.
  • प्रशासनिक उदासीनता: आज स्थिति यह है कि पुलिस और परिवहन अधिकारियों की नाक के नीचे से ये गाड़ियां बिना किसी डर के गुजर रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है.

हादसों का बढ़ा जोखिम और चरमराती यातायात व्यवस्था

जुगाड़ गाड़ियों का अनियंत्रित संचालन शहर की यातायात व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है:

  • सड़क हादसों का खतरा: अक्सर क्षमता से अधिक (ओवरलोड) माल लादकर चलने के कारण ये गाड़ियां अनियंत्रित हो जाती हैं. हाल ही में जिले के कई इलाकों में इनके कारण कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं.
  • लगता है लंबा जाम: धीमी गति से चलने और अचानक सड़क के बीच में बंद हो जाने के कारण बाजारों में घंटों ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम ग्राहकों और दुकानदारों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है.

रोजी-रोटी और कानून के बीच उलझन

जुगाड़ वाहनों के बढ़ते जाल के पीछे गहरा आर्थिक पहलू भी जुड़ा हुआ है:

  • गरीबी और मजबूरी: ग्रामीण इलाकों में छोटे किसान और व्यापारी महंगे कमर्शियल वाहन खरीदने में असमर्थ होते हैं. कम लागत में तैयार होने के कारण वे इसे खेत से मंडी तक सामान ढोने या भाड़ा धोने का जरिया बनाते हैं.
  • अवैधता और जनसुरक्षा: हालांकि यह उनकी आजीविका की मजबूरी हो सकती है, लेकिन सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर सड़कों पर अवैध रूप से चलने वाले ये वाहन किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं.

स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि कागजी आदेशों से बाहर निकलकर सड़कों पर ठोस चेकिंग अभियान चलाया जाए, ताकि अनमोल जिंदगियों को हादसों से बचाया जा सके.


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By Aman Kumar

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