Madhepura, सदर अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा ठप, मरीज परेशान

सदर अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा ठप, मरीज परेशान

मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट,

जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, सदर अस्पताल मॉडल अस्पताल में तब्दील होने के वाबजूद भी आज भी सीटी स्कैन जैसी बुनियादी जांच सुविधा से वंचित है. न्यूरो, हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना और सिर की गंभीर चोट वाले मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट सेंटरों या भागलपुर-सहरसा-पटना रेफर होना पड़ रहा है. इससे गरीब मरीजों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है.

मरीजों का दर्द :

इमरजेंसी में आए हेड इंजरी के मरीज को तुरंत सीटी स्कैन जरूरी होता है. सदर अस्पताल में सुविधा न होने से परिजन मेडिकल कॉलेज या 3 या चार घंटे सफर का एंबुलेंस में अन्य जिला लेकर भागते हैं• प्राइवेट सेंटरों में ब्रेन सीटी के 2000-3500 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि सरकारी दर 750-1050 रुपये है. दिहाड़ी मजदूर और बीपीएल परिवारों के लिए यह बोझ बन जाता है. पहले भी सदर अस्पताल में सीटी स्कैन शुरू होने की खबर आई थी, जिससे मरीजों को कम कीमत पर जांच मिल रही थी. मगर अब फिर से सेवा ठप है. आगे बता दूं कि बिहार-झारखंड के कई सदर अस्पतालों में सीटी स्कैन 24×7 चालू है. मधेपुरा के मरीज पूछ रहे हैं – “जब हर जगह हो सकता है, तो यहां क्यों नहीं? ”

मरीजों की मांग

सीटी स्कैन यूनिट को तुरंत चालू किया जाए. जब तक मशीन शुरू न हो, आयुष्मान भारत योजना के तहत प्राइवेट सेंटर से टाई-अप कर मुफ्त जांच की व्यवस्था हो। टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हो, ताकि रात में आने वाले ट्रॉमा मरीजों को रेफर न करना पड़े. सदर अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा नहीं रहने से मरीजों में आर्थिक शोषण का बोझ हो जाता है.दरअसल सदर अस्पताल के हर विभाग में नियुक्ति का नहीं होना सबसे बड़ी समस्या है. हर विभाग में कर्मियों का अभाव है, जिससे सदर अस्पताल हर मामले में असफल साबित हो रहा है. बाहर से देखने में भले ही यह सदर अस्पताल बेहतर लगने लगा हो, लेकिन अंदर जाने के बाद अस्पताल के व्यवस्था की पोल खुल जाती है. सदर अस्पताल में डीएम से लेकर प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का लगातार आना लगा रहता है. इसके बावजूद चिकित्सक व कर्मियों की कमी का समाधान नहीं हो पा रहा है.

सिटी स्कैन के लिए मरीजों को रोज किया जाता है रेफर

सदर अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा नहीं है. सिटी स्कैन की सुविधा नहीं रहने के कारण मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जिससे गंभीर मरीजों को इलाज कराने में परेशानी होती है. बता दें कि सिटी स्कैन में न्यूनतम 5000 रुपये व अधिकतम डेढ़ लाख रुपये खर्च होते हैं. प्रतिमाह औसतन एक सौ से अधिक मरीजों को पीएमसीएच या डीएमसीएच रेफर किया जाता है. जब मरीजों को सदर अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किया जाता है, तो अक्सर हायर सेंटर ले जाने के क्रम में रास्ते में ही मौत हो जाती है. लोगों का कहना है कि अगर सिटी स्कैन की सुविधा यहां होती तो गंभीर रूप से घायलों की जान बच सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Manish kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
Tags
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >