Madhepura News बीएनएमयू ने कॉलेजों को भेजा अल्टीमेटम, पांच दिन में दें नियुक्ति व वित्तीय ब्योरा

पेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों पर सख्ती बढ़ा दी है.

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट Madhepura News : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों पर सख्ती बढ़ा दी है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे नियुक्ति, मान्यता (एफिलिएशन) और वित्तीय मामलों से जुड़ी पूरी जानकारी पांच दिनों के भीतर निर्धारित फॉर्मेट में उपलब्ध कराएं. यह आदेश कुलसचिव की ओर से 27 अप्रैल को जारी पत्र के माध्यम से दिया गया है. पत्र के मुताबिक, लोक भवन पटना में 11 जनवरी 2026 को हुई बैठक के संदर्भ में यह कार्रवाई की जा रही है. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति के कॉलेज पहुंचने से पहले सभी कागजात तैयार रखें और निरीक्षण के दौरान हर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.

क्या-क्या देना होगा : फॉर्मेट ए में नियुक्ति का पूरा हिसाब

विश्वविद्यालय द्वारा भेजे गए फॉर्मेट ए में कॉलेजों को शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी. इसमें स्वीकृत पदों की संख्या (राज्य सरकार,विश्वविद्यालय से), विषयवार पद और उनकी स्वीकृति स्थिति, शिक्षकों की नियुक्ति तिथि, जॉइनिंग, नियमितीकरण और सेवानिवृत्ति विवरण कॉलेज सेवा आयोग से स्वीकृति की स्थिति साथ ही, गैर-शिक्षक कर्मियों के पद, नियुक्ति प्रक्रिया और अनुमोदन का पूरा ब्यौरा भी अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज जैसे विज्ञापन की कॉपी, इंटरव्यू की कार्यवाही और गवर्निंग बॉडी, सेलेक्शन कमेटी की बैठक की प्रतिलिपि भी जमा करनी होगी.

फॉर्मेट बी में वित्तीय पारदर्शिता पर जोर

फॉर्मेट बी के तहत कॉलेजों को वित्तीय रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा, जिसमें पिछले दो वर्षों का चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑडिट रिपोर्ट कैश बुक, फीस संरचना, चेक इश्यू रजिस्टर पिछले दो वर्षों का छात्र नामांकन (सेमेस्टर वाइज, एससी एसटी व महिला अलग-अलग), गवर्निंग बॉडी, डेवलपमेंट कमेटी की दस बैठकों की कार्यवाही, पिछले पांच वर्षों का स्टॉक रजिस्टर और लाइब्रेरी एक्सेशन रिकॉर्ड दिखाना होगा.

जांच में सहयोग नहीं करने पर होगी कार्रवाई

विश्वविद्यालय ने साफ कहा है कि निरीक्षण के दौरान यदि कोई कॉलेज आवश्यक सूचना या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता है, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा. ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में हलचल तेज हो गई है. प्राचार्य और प्रशासनिक कर्मी रिकॉर्ड जुटाने में लग गए हैं. कई कॉलेजों के लिए पांच दिन की समय-सीमा चुनौती बन सकती है, खासकर जहां पुराने रिकॉर्ड अपडेट नहीं हैं.

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By MD. TAZIM

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