11 अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाण पत्र पर सवाल, बीएन मंडल विश्वविद्यालय ने मांगा जवाब

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा ने 11 अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए हैं. विश्वविद्यालय ने इन प्रमाण पत्रों को प्रथम दृष्टया अमान्य, अवैध या फर्जी पाया है. सभी संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है.

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा ने विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय विभागों में कार्यरत 11 अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाण पत्र को लेकर कारण पृच्छा जारी की है. विश्वविद्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इन अतिथि शिक्षकों द्वारा सेवा में चयन के दौरान प्रस्तुत किए गए अनुभव प्रमाण पत्र संबंधित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से प्राप्त रिपोर्ट के आलोक में प्रथम दृष्टया अमान्य, अवैध अथवा फर्जी पाए गए हैं.

तीन दिनों में देना होगा स्पष्टीकरण

विश्वविद्यालय ने संबंधित सभी अतिथि शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में जमा करने का निर्देश दिया है. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है या दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी.

इन 11 अतिथि शिक्षकों से मांगा गया जवाब

विश्वविद्यालय की सूची में राज कुमार रजक, अतिथि शिक्षक, समाजशास्त्र विभाग, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा; कुमारी पुष्पलता प्रिया, अतिथि शिक्षिका, विश्वविद्यालय भूगोल विभाग; सुरभि चन्दा, अतिथि शिक्षिका, जंतु विज्ञान विभाग, आरएम कॉलेज, सहरसा; राहुल कश्यप, अतिथि शिक्षक, जंतु विज्ञान विभाग, एमएचएम कॉलेज, सोनवर्षा, सहरसा शामिल हैं.

इसी तरह ब्यूटी कुमारी, अतिथि शिक्षिका, राजनीति शास्त्र विभाग, बीएनएमवी कॉलेज, साहूगढ़, मधेपुरा; वीरेंद्र, अतिथि शिक्षक, इतिहास विभाग, टीपी कॉलेज, मधेपुरा; बिंदु कुमार मिश्र, अतिथि शिक्षक, रसायनशास्त्र विभाग, आरएम कॉलेज, सहरसा; मो. असरारुल हक, अतिथि शिक्षक, एआईएच विभाग, आरएम कॉलेज, सहरसा; मनीष कुमार, अतिथि शिक्षक, भूगोल विभाग, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा; शक्ति प्रसाद तिवारी, अतिथि शिक्षक, विश्वविद्यालय इतिहास विभाग तथा अरविन्द कुमार, अतिथि शिक्षक, इतिहास विभाग, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा का नाम शामिल है.

अंतिम निर्णय तक पढ़ाने पर रोक

विश्वविद्यालय ने संबंधित विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मिले प्रतिवेदन के आधार पर अनुभव प्रमाण पत्रों को प्रथम दृष्टया अमान्य बताया है. इसी आधार पर अंतिम निष्कर्ष आने तक इन अतिथि शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक वर्गाध्यापन कार्य से मुक्त रखने का निर्देश दिया गया है.

जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

विश्वविद्यालय ने संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है. अब तीन दिनों के भीतर प्राप्त होने वाले स्पष्टीकरण और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है. विश्वविद्यालय की ओर से यह पत्र 9 सितंबर 2026 को जारी किया गया है. यदि स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया जाता है या निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलता है, तो सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है.

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लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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