तेज रफ्तार, संकरी सड़क, अचानक मोड़, खराब दृश्यता और ट्रैफिक संकेतों की कमी से हो रहे हादसे ग्रामीण सड़कों पर संकरे पुल, बिना रेलिंग की पुलिया, टूटी सड़कें और अचानक मोड़ दुर्घटनाओं का बड़ा कारण मधेपुरा. जिले की सड़कों पर चिह्नित ब्लैक स्पॉट अब आमलोगों के लिए लगातार परेशानी और खतरे का कारण बनते जा रहे हैं. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ऐसे कई मोड़, चौराहे और सड़क हैं, जहां बार-बार हो रही सड़क दुर्घटनाएं सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है. इसके बावजूद ब्लैक स्पॉट सुधार के नाम पर महज खानापूर्ति किए जाने से हालात जस के तस बने हुए हैं. बार-बार हादसे, फिर भी लापरवाही ब्लैक स्पॉट उन स्थानों को कहा जाता है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है. जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य पथ और प्रमुख जिला सड़कों पर कई ऐसे बिंदु हैं, जहां तेज रफ्तार, संकरी सड़क, अचानक मोड़, खराब दृश्यता और ट्रैफिक संकेतों की कमी हादसों को न्योता दे रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर वर्षों से दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है. शहर के चौराहों पर सबसे ज्यादा खतरा शहर के सुभाष चौक, कॉलेज चौक, थाना रोड, स्टेशन रोड जैसे व्यस्त इलाकों में ब्लैक स्पॉट की स्थिति चिंताजनक है. यहां दिनभर वाहनों, ई-रिक्शा और पैदल यात्रियों की आवाजाही रहती है. अवैध पार्किंग, सड़क किनारे ठेले-खोमचे और अतिक्रमण के कारण सड़कें सिकुड़ जाती हैं. ऐसे में हल्की सी चूक भी गंभीर हादसे में तब्दील हो जाती है. ग्रामीण इलाकों में भी हालात बदतर ग्रामीण सड़कों पर संकरे पुल, बिना रेलिंग की पुलिया, टूटी सड़कें और अचानक मोड़ दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बने हुए हैं. रात के समय स्ट्रीट लाइट और रिफ्लेक्टर की कमी से खतरा और बढ़ जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद सिर्फ निरीक्षण कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. कागजों तक सिमटी प्रशासनिक पहल यातायात विभाग और जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई धीमी है. कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि स्पीड ब्रेकर, संकेतक, स्ट्रीट लाइट, सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने जैसे जरूरी उपाय अधूरे हैं. जनहित में ठोस कदम जरूरी स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से ब्लैक स्पॉट पर त्वरित और ठोस कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि दुर्घटना के बाद मुआवजा और जांच से ज्यादा जरूरी हादसों को रोकना है. विशेषज्ञों के अनुसार सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन और जन जागरूकता से ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है. मधेपुरा जैसे विकासशील जिले में सुरक्षित सड़कें बुनियादी जरूरत हैं. अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक ब्लैक स्पॉट को केवल आंकड़ों में गिनता रहेगा और कब इन्हें वास्तव में दुरुस्त कर लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.
ब्लैक स्पॉट बने जानलेवा, मधेपुरा की सड़कें खतरे में, रोज जा रही जानें
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