कुमारखंड . प्रखंड के टेंगराहा सिकयाहा पंचायत के एक वार्ड सदस्य द्वारा पत्नी को सेविका बनाने के लिए तीन बार इस्तीफा देने का मामला प्रकाश में आया है. जानकारी के अनुसार टेंगराहा सिकयाहा पंचायत स्थित वार्ड संख्या – तीन के केंद्र संख्या – 208 पर सेविका बनाने के लिए वार्ड सदस्य मनोज कुमार के द्वारा तीन बार वार्ड सदस्य पद से इस्तीफा देने की बात सामने आई है.
प्रखंड कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वार्ड सदस्य श्री कुमार ने 10 जून 2013 को पहली बार 15 नवंबर 2014 को दुसरी बार और फिर सात दिसंबर 2014 को तीसरे दफा मुखिया तेतरी देवी के समक्ष इस्तीफा देने की बात बताई गई है. इस संबंध में अलग-अलग तिथि को डाक द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी को सूचना भेजी गई थी. वहीं पंचायत सचिव द्वारा दिनांक 07.12.2014 को श्री कुमार के इस्तीफा की पुष्टि कर रहे हैं. त्यागपत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए कहा कहते हैं कि इस तिथि से पुर्व उन्होंने पंचायत के बैठकों में वार्ड सदस्य के तौर पर भाग लिया है. वार्ड सदस्य द्वारा तीन बार त्यागपत्र देने का मामला प्रखंड कार्यालय लेकर पंचायत वासियों तक के लिए सरदर्दी बनकर रह गया है. त्याग पत्र संबंधी विवाद के कारण मनोज कुमार की पत्नी नीलू कुमारी का चयन सेविका पद पर नहीं हुआ. वहीं आम सभा में दूसरी अभ्यर्थी संगीता कुमारी का चयन सेविका पद पर हो गया.
डीएम ने दिया था आम सभा का निर्देश
सेविका चयन होने के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं लिया और मामला जिला मुख्यालय तक पहुंच गया. जिला पदाधिकारी के न्यायालय में वाद दायर कर सेविका चयन को चुनौती दे दी गई. जहां जिला पदाधिकारी ने अपने न्यायादेश में त्यागपत्र मामले को स्पष्ट नहीं किये जाने तथा इसका कोई प्रमाण अंकित नहीं करने के कारण विवाद उत्पन्न होने बात कही तथा पुन: आम सभा कराकर सेविका चयन की कार्यवाई करने का आदेश दिया गया है.
इधर आम सभा में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी द्वारा पंचायत सचिव से त्याग पत्र संबधी पंजी तथा त्याग पत्र का आवेदन पत्र ले लिया गया है. इस संबध में प्रखंड प्रमुख चंद्रकला देवी ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम के तहत पंचायत सचिव द्वारा पुष्टि किये गये त्याग पत्र का महत्व होना चाहिए न कि प्रखंड कार्यालय में केवल सूचना के तौर पर भेजे गए त्याग पत्र का. इसके लिए पंचायत कार्यालय में उपलब्ध त्याग पत्र और अन्य बैठक पंजी का अवलोकन कर ही कोई निर्णय न्याय संगत होगा. इस संबध में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि पंचायत से संबंधी अभिलेख पंचायत में होता है. इसलिए सच और झूठ का प्रमाण पंचायत ही दे सकता है. जहां तक प्रखंड कार्यालय में भेजे गए सूचना के तौर पर त्याग पत्र की प्रति पंचायत सचिव के माध्यम से नहीं आयी है. इसलिए इसे प्रमाणिक मान लेना उचित प्रतीत नहीं होता है.
