खुशखबरी. केंद्रीय परिवहन मंत्री ने सांसद पप्पू यादव की मांग पर एनएच को दी मंजूरी
मिथिला को दो हिस्सों में बांटने के बाद कोसी नदी से पूर्व का क्षेत्र कोसी क्षेत्र कहलाता है. लेकिन इन दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिये दो नये राष्ट्रीय राजमार्ग का तोहफा मिला है. भारत सरकार के परिवहन मंत्री नितीन गडकरी ने मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव की मांग पर इन एनएच को मंजूरी दी है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने बिहार सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख कर डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया है.
मधेपुरा : गौरतलब है कि विगत वर्ष छह अक्तूबर को मधेपुरा लोस सांसद ने भारत सरकार के सड़क परिवहन राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिख कर मधुबनी जिले के उच्चैठ भगवती स्थान उमगांव को सहरसा से जोड़ने के लिये एवं नुनुपट्टी से बनमनखी तक एनएच की मांग की थी. वहीं दूसरी ओर एनएच 107 पर स्थित खगड़िया जिले के माली चौक से लेकर एनएच 106 पर स्थित मधेपुरा जिले के फुलौत तक एनएच की मांग की थी.
भारत सरकार के सड़क परिवहन राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक मार्च को सांसद पप्पू यादव को पत्र लिख कर उनकी मांग पर एनएच को मंजूरी दिये जाने के बारे में सूचना दी. अपने पत्र में उन्होंने सड़क संबंधी उनकी दोनों मांगों को पूरा करने की सूचना देते हुए डीपीआर तैयार करने के बारे में बिहार सरकार के संबंधित विभाग से जानकारी लेते रहने का भी अनुरोध किया है.
बनेंगी ये सड़कें: मधुबनी जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल स्थित उच्चैठ भगवती स्थान के उमगांव से बासोपट्टी- बेनीपट्टी- रहिका- मधुबनी- रामपट्टी होते हुए भेजा के पास कोसी नदी पर प्रस्तावित नये पुल से गुजर कर सहरसा जिले के महिषी तारास्थान- बनगांव – बरियाही होते हुए एनएच 327 ए से जुड़ेगी.
वहीं एनएच 327 पर स्थित भेजा सड़क जंकशन से कोसी नदी पर प्रस्तावित नये पुल से गुजर कर नुनुपट्टी – सुपौल जिले के बरूआरी- लौकहा होते हुए मधेपुरा जिले के तरावे- सिंहेश्वर में एनएच 131 से होते हुए – रानीपट्टी- खुर्दा होते हुए पूर्णिया जिले के चकमका- बनमनखी में एनएच 107 पर मिलाया जायेगा. यह दूरी करीब 90 किमी की होगी.
वहीं दूसरी ओर एनएच 107 पर स्थित खगड़िया जिले के माली चौक से लेकर मौरा- खाड़ा- बुधमा- खुरहान-आलमनगर – बजराहा होते हुए एनएच 106 पर स्थित मधेपुरा जिले के फुलौत तक एनएच को मंजूरी मिली है. इस सड़क के लिये भी जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
उच्चैठ से बरियाही व नूनूपट्टी से बनमनखी तक होगा सड़क का निर्माण
मिटेंगी दो दिलों की दूरियां
करीब 1940 से 50 के दशक में जब कोसी नदी ने मिथिला को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया तब कई गांव बिखर गये थे. एक परिवार के कुछ सदस्य एक तरफ रह गये तो कुछ सदस्य दूसरी ओर. विगत पचास -साठ साल में कई लोगों ने अपने मूल गांव को नहीं देखा. फोरलेन बनने के बाद इन दूरियों में कमी तो आयी लेकिन मधुबनी और दरभंगा जिले के कोसी नदी के किनारे पड़ने वाले गांवों में अब भी ऐसे सैकड़ों परिवार हैं. मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर में कई ऐसे परिवार हैं जिनके गांव कोसी के पश्चिमी किनारों पर हैं. विगत पचास-साठ वर्षों में इन परिवारों की वर्तमान पीढ़ियां अपने गांवों के बस किस्से सुना करती है. इन सड़कों के बनने के बाद न केवल ये बिछड़े परिवार आसानी से मिल सकेंगे बल्कि कई नये रिश्ते भी बनेंगे.
पीडब्ल्यूडी विभाग को डीपीआर बनाने का दिया निर्देश
भारत सरकार के सड़क परिवहन राजमार्ग एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इन एनएच को मंजूरी देने के निर्णय के आलोक में परिवहन मंत्रालय ने बिहार सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख कर एनएच 327 के भेजा जंक्शन से नुनुपट्टी – सुपौल जिले के बरूआरी- लौकहा होते हुए मधेपुरा जिले के तरावे- सिंहेश्वर में एनएच 131 से होते हुए – रानीपट्टी- खुर्दा होते हुए पूर्णिया जिले के चकमका- बनमनखी सड़क का डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया है.
कोसी क्षेत्र और मिथिला अभिन्न हैं. कालांतर में एक ही इलाके के दो हिस्से हो गये. वहीं मधेपुरा -सहरसा और खगड़िया जिले को जोड़ने के लिये भी एक एनएच स्वीकृत किया गया है. मुझे खुशी है कि इन इलाकों के विकास के लिये मेरी अनुरोध पर पर माननीय केंद्रीय परिवहन मंत्री ने दो एनएच को मंजूरी दी है. कोसी के विकास के लिये मैंने जो रूपरेखा बनायी है, मैं उसी दिशा में अपना पूर्ण प्रयास कर रहा हूं. मेरे लिये केवल जनता ही सर्वोपरि है.
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, सांसद मधेपुरा लोस
