मैट्रिक परीक्षा . पहले दिन जिला मुख्यालय के 23 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण रही परीक्षा
जिले में मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन परीक्षा केंद्रों पर चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था देखी गयी. लेकिन, परीक्षा आरंभ से लेकर समाप्ति तक पूरा शहर जाम से जूझता रहा. सड़क पर वाहन रेंगते नजर आये. जाम का शिकार सबसे अधिक स्कूली बच्चे बने. उधर, दस अभिभावकों को गिरफ्तार किया गया.
मधेपुरा : जिला मुख्यालय के 23 परीक्षा केंद्रों पर बुधवार से शुरू मैट्रिक परीक्षा के पहले ही दिन प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खुल गयी. परीक्षा आरंभ से लेकर परीक्षा समाप्ति तक पूरा शहर जाम से जूझता रहा. खासकर प्रथम पाली की परीक्षा समाप्त होने के बाद जाम ने छात्र-छात्राओं को खुल रुलाया. वहीं इस दौरान अभिभावकों के पसीने छूटते रहे. यह स्थिति दूसरे पाली की परीक्षा समाप्ति तक बनी रही. देर शाम ही शहर की स्थिति सामान्य हो सकी. गौ इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में 35 हजार छात्र छात्राएं भाग ले रही है. इस बाबत जिला मुख्यालय में जहां टीपी कॉलेज, पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, बीएनएमभी कॉलेज, सीएम साइंस डिग्री एवं इंटर कॉलेज, मधेपुरा डिग्री एवं इंटर कॉलेज,
आरपीएम डिग्री एवं इंटर कॉलेज, वेदव्यास कॉलेज, वीमेंस इंटर कॉलेज, अनुग्रह उच्च विद्यालय सुखासन, इवनिंग कॉलेज मधेपुरा, राधेश्याम प्रमोद उच्च विद्यालय, एसएनपीएम प्लस टू स्कूल, रासबिहारी प्लस टू स्कूल, टीपी कॉलेज उच्च विद्यालय, केशव कन्या प्लस टू स्कूल, शांति आदर्श मध्य विद्यालय, गिरजा कपिलदेव उच्च विद्यालय, राजकीय कन्या मध्य विद्यायल, एसएन पीएम लॉ कॉलेज, केबी महिला कॉलेज को केंद्र बनाया गया है. बता दे कि छात्र के अनुपात में अभिभावकों की संख्या शहर में कई गुणा बढ़ गयी है.
जिसके कारण मैट्रिक परीक्षा का पहला दिन जाम के नाम रहा. जिले में मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन परीक्षा केंद्रों पर चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था देखी गयी. हर केंद्र पर परीक्षार्थियों को कड़ी जांच से दौर से गुजरना पड़ा. परीक्षा केंद्र के अंदर सुरक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि परिंदा भी पर नहीं मार सके. इस दौरान मुख्यालय स्थित सभी 23 परीक्षा केंद्रों पर पहले दिन की परीक्षा कदाचार मुक्त व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ.
मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन प्रथम पाली की परीक्षा समाप्ति के बाद शहर में हर तरफ जाम ही जाम का नजारा दिख रहा था. विवि से लेकर कॉलेज चौक, सुभाष चौक से लेकर कर्पूरी चौक तक वाहनों की लंबी कतार लगी हुयी थी. जाम में फंसने के कारण छात्र परेशान दिखे. खासकर छात्राएं जाम समाप्ति का घंटों इंतजार करते रही. इस दौरान जाम समाप्त कराने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल होता नहीं देख अभिभावकों में आक्रोश पनप रहा था.
डा राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि मुझे बसंतपुर जाना है और वहां पीएसी में विकलांगों को प्रमाण पत्र प्रदान करना है. इस जाम को देखते हुए यही लगता है कि जिले की ट्रैफिक व्यवस्था चड़मड़ायी हुयी है.
जाम में फंसे कृष्ण कुमार ने कहा कि मुझे गम्हरिया जाना है. जाम की स्थिति देख कर लगता है कि फिर वापस लौटना पड़ेगा. कृष्ण कुमार ने भीषण जाम को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को कसूरवार ठहराया.
नरेश कुमार सिंह ने कहा कि जाम की यह हालात प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रही है. मैट्रिक परीक्षा के पहले ही दिन प्रशासनिक व्यवस्था फेल हो गयी और लोगों को भीषण जाम से जूझना पड़ा.
सिंहेश्वर से पूजा कर लौट रहे फारबिसगंज निवासी संजय कुमार मेहता ने कहा कि बाबा सिंहेश्वर का पूजा करने सपरिवार सिंहेश्वर आये थे. लेकिन लौटने के क्रम में मधेपुरा में भीषण जाम में घंटों फंसे रहे अब लगता है रात के 12 बजे तक घर पहुंच पायेंगे.
मो कमरूजन्ना उर्फ पप्पू ने कहा कि मैट्रिक परीक्षा के पहले ही दिन पूरा शहर जाम के भेंट चढ गया. हर तरफ शहर में जाम ही जाम का नजारा दिख रहा था. जाम के फंसने के कारण विवि जाने से वंचित रह गये लौट कर घर जाना पड़ रहा है.
जाम में फंसे छात्र नेता मो वसीमउद्धीन ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरूस्त रहती तो आज शहर को जाम से जुझना नहीं पड़ता. हालांकि परीक्षा केंद्र के अंदर व बाहर प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरुस्त देखी गयी लेकिन शहर को जाम से निजात दिलाने का कोई उपाय नहीं किया गया.
