ऐसा ही रहा तापमान तो गेहूं की पैदावार होगी बीस फीसदी कम

ऐसा ही रहा तापमान तो गेहूं की पैदावार होगी बीस फीसदी कम प्रतिनिधि, मधेपुरा़अगर ऐसा ही तापमान रहा तो गेहूं की पैदावार न केवल बीस फीसदी तक कम हो जायेगी बल्कि दाने की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित हो जायेगी़ यह कहना है कृषि विकास केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक कृषि वैज्ञानिक डाॅ मिथिलेश राय का़ […]

ऐसा ही रहा तापमान तो गेहूं की पैदावार होगी बीस फीसदी कम प्रतिनिधि, मधेपुरा़अगर ऐसा ही तापमान रहा तो गेहूं की पैदावार न केवल बीस फीसदी तक कम हो जायेगी बल्कि दाने की गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित हो जायेगी़ यह कहना है कृषि विकास केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक कृषि वैज्ञानिक डाॅ मिथिलेश राय का़ उन्होंने बताया कि सामान्यतया इन दिनों अधिकतम तापमान 15 से 20 डिग्री रहा करता था लेकिन फिलवक्त न्यूनतम तापमान 9़5 एवं अधिकतम तापमान 25 डिग्री है़ अगर यही स्थिति रही गेहूं के पौधों में कल्ला (पौधों से निकलने वाले कोंपल) नहीं बनेगा़ अगर कल्ला नहीं बना तो पौधों की संख्या कम हो जायेगी़ कल्ला निकलने के लिए 15 से 20 डिग्री तापमान चाहिए़ अभी समय कल्ला निकलने का ही है़ डाॅ मिथिलेश कहते हैं कि अभी तक जो तापमान है यही कायम रहा तो फसल अपनी आयु से पहले ही पक जायेगा़ फसल के पकने का समय औसतन 135 दिनों का होता है़ — प्रबंधन की है जरूरत — डा मिथिलेश कहते हैं कि गेहूं के फसल के प्रबंधन की जरूरत से क्षति को कम किया जा सकता है़ खर पतवार खेत से पूरी तरह हटा दें. अभी औसतन गेहूं के पौधो की आयु 25 से 30 दिनों की है़ कल्ला निकलने का यही समय होता है़ प्रबधंन के लिए किसान टोटल नाम की दवाई का छिड़काव करें तो क्षति कम होगी़ यह दवा सल्फा सल्फयूरॉन 75 फीसदी और मेट सल्फयूरॉन 5 फीसदी का मिश्रण है़ 16 ग्राम दवा को छह लीटर पानी में मिला लें. इसमें दवा के साथ आने वाले रसायन सर्फेक्टांट पांच सौ ग्राम को घोल में मिला दें. अब इस तैयार घोल में से एक लीटर घोल को 14 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें. वहीं 150 से 200 ग्राम यूरिया प्रति कट्ठा इस्तेमाल करें. इस प्रबधंन से फसल अपनी आयु पूरी कर सकेगा और मौसम से होनी वाली क्षति को कम किया जा समा है़ — पटवन करें ज्यादा — डाॅ मिथिलेश ने बताया कि समान्यत: दो तीन सिंचाई की जाती है लेकिन इस स्थिति में पटवन की संख्या बढ़ानी होगी. 20 से 25 दिन में पहली सिंचाई, 40 से 45 दिन में गांठ निकलते वक्त दूसरी सिंचाई, 70 से 75 दिन में फसल के गाभा वस्था के समय तीसरी सिंचाई एवं 90 से सौ दिनों में दूध भरते समय चौथी सिंचाई जरूर करें.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >