ओपीडी में बना यूरिनल भी है टूटा फूटा, नहीं होती है मरम्मत
-इमरजेंसी वार्ड में मूत्रालय नहीं रहने के कारण लोग जहां – तहां मूत्र त्याग के लिए विवश
मधेपुरा : सदर अस्पताल को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में सबसे अच्छा माना जाता है. लोग इस उम्मीद से सदर अस्पताल आते हैं कि यहां उनके परिजन का बेहतर इलाज होगा एवं बेहतर सुविधाएं मिलेगी. परंतु लोग जब सदर अस्पताल आते है तो उन्हें यहां की स्थिति कुछ अलग नजर नहीं आती. अगर कुछ फर्क नजर आता है तो लोगों की भीड़. गरीब तो यहीं इलाज के लिए मजबूर हैं लेकिन अन्य लोग यही सोचते हैं कि कहीं अन्य जगह चले गये होते. सदर अस्पताल में लोगों की बुनियादी जरूरतों का अभाव इनके कारण हो सकते है.
इमरजेंसी वार्ड में मूत्रालय है नदारद . सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में शौचालय तो है परंतु साफ सफाई व मूत्रालय के अभाव के कारण शौचालय से बदबू आती है. लोग शौचालय के बगल जाने से भी परहेज करते हैं. मूत्रालय नहीं रहने के कारण पुरूष व खास कर महिलाएं को शौचालय को ही मूत्रालय की तरह उपयोग करना पड़ रहा है. वहीं शौचालय के बदबू के कारण ज्यादातर लोग अस्पताल परिसर व भवन की दीवार के ओट का सहारा लेते हैं.
सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मूत्रालय नहीं रहने से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सर्दियों के दिनों में तो सदर अस्पताल में आये लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है. वहीं ओपीडी में बना मूत्रालय क्षतिग्रस्त है.
इमरजेंसी में मरीजों के परिजन को बैठने के लिए नहीं है कोई व्यवस्था —
जब कोई मरीज इमरजेंसी वार्ड में भरती होते है तो जाहिर सी बात है कि उन्हें अन्य लोगों की भी जरूरत रहती है.परंतु सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के परिजन या मददगार के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं रहने के कारण उन्हें यत्र – तत्र अस्पताल परिसर में खड़ा रहना पड़ता है. जिससे परिजन व मदद गार को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
