10वां जिला सत्संग समारोह आयोजित.

10वां जिला सत्संग समारोह आयोजितफोटो- मधेपुरा 05,06कैप्शन- प्रवचन देते महात्मा व उपस्थित भीड़. प्रतिनिधि, शंकरपुर प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोनवर्षा चंपावती स्थान में संत पंथ आश्रम मधेपुरा द्वारा 10 वां जिला सत्संग समारोह का आयोजन किया गया है. जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में परम पूज्य आचार्य श्रीधर्म स्वरूप साहब उपस्थित थे. मौके पर […]

10वां जिला सत्संग समारोह आयोजितफोटो- मधेपुरा 05,06कैप्शन- प्रवचन देते महात्मा व उपस्थित भीड़. प्रतिनिधि, शंकरपुर प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोनवर्षा चंपावती स्थान में संत पंथ आश्रम मधेपुरा द्वारा 10 वां जिला सत्संग समारोह का आयोजन किया गया है. जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में परम पूज्य आचार्य श्रीधर्म स्वरूप साहब उपस्थित थे. मौके पर उन्होंने कहा कि संग हमारा जीवन है, जिसकी रूप में जिंदगी खड़ा भीतर आत्मा व बाहर शरीर साधन और साध्य दोनों है. सज्जनों के संग सत्संग एकाग्रता सज्जन कहलाता है. सत्संग से बौद्घिक जड़ता समाप्त होती है. बाल्मिकी जी ने रत्नाकार अंगुलीमाल का नाम अंगुलिमाल रखा था. मार्ग में परिवर्तन व मान सम्मान को बढ़ाता है. संघ जीवन में सद बुद्धि का संचार करता है. आसन लगा कर आंख बंद करना ध्यान है. बच्चों को बचपन से अंतिम समय तक स्वार्थ कि शिक्षा दी जाती है. जिस कारण बच्चों में अनेक विसंगतियां आती है. इसके लिए जरूरी है बच्चों को अध्यात्म से जुड़ी शिक्षा दी जाय. वहीं राजू परेदशी ने भजन के माध्यम से समाज में हो रहे विसंगति को चरितार्थ करते हुए गाया कि ‘काम एैसा कि जाय की जग में फिर से न आना परे, कर्म ही इंसान की अच्छी- बूरी पहचान है.

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