जेल में गांधीगिरी का मिलेगा ज्ञान, सत्य व अहिंसा को आत्मसात करेंगे शातिर

मधेपुरा : कहा जाता है जो कोई काम दबाव से नहीं होता है, वह काम प्रेम और अहिंसा से कराया जा सकता है. बापू के इसी सिद्धांत ने देश को पराधीनता से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभायी. उसी गांधीगिरी के सहारे बिहार सरकार अब कैदियों को हिंसा के रास्ते से हटा कर सत्य व […]

मधेपुरा : कहा जाता है जो कोई काम दबाव से नहीं होता है, वह काम प्रेम और अहिंसा से कराया जा सकता है. बापू के इसी सिद्धांत ने देश को पराधीनता से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभायी. उसी गांधीगिरी के सहारे बिहार सरकार अब कैदियों को हिंसा के रास्ते से हटा कर सत्य व अहिंसा के रास्ते पर लाने की प्रयास कर रही है.

जिला मुख्यालय स्थित मंडल कारावास में कैदियों को बापू का ज्ञान मिलेगा. जेलों में दो सितंबर से लेकर आगामी दो अक्टूबर तक लगातार एक महीने बंदियों को बापू के जीवन से जुड़ी कहानियां सुनाया जायेगा.
बापू के जीवन से संबंधित दो पुस्तकें एक था मोहन व बापू की पाती कैदियों को पढ़कर सुनाया जाएगा. दो सितंबर से दो अक्तूबर तक जेल के सभी बंदियों को दोनों किताब की कहानी सुना कर मुख्यधारा से जोड़ने का आवाहन किया जायेगा. गौरतलब है कि पूर्व में स्कूल के प्रार्थना के वक्त बापू से जुड़ी कहानियां का वाचन शुरू करवाया था. जेल में कैदियों के बीच यह पहला व अनोखा प्रयोग है.
बापू के विचारों से अपराधिक मानसिकता पर प्रहार : जेल में कैदियों को कहानी सुनाने के पीछे सरकार की यह मंशा है कि कैदी जेल में बापू के जीवन की कहानियां सुनाई जाने से कैदी सत्य व अहिंसा का उपदेश सुनकर अपने जीवन में उतारेंगे. सरकार का प्रयास है कि कैदी रिहाई के बाद दुबारा अपराध की दुनिया में कदम न रखें.
एक था मोहन व बापू की पाती
सोपान जोशी द्वारा लिखित पुस्तक एक था मोहन बिहार सरकार की परियोजना रही है. सोपान जोशी द्वारा लिखित इस पुस्तक में को आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर ने प्रकाशित किया है. गांधी जी के जीवन से जुड़ी बातें काफी रोचक तरीके से इस पुस्तक में बतायी गयी है.
मसलन 34 छात्रों में मोहनदास करमचंद गांधी 32 वें नंबर पर रहते थे. वहीं पुस्तक बापू की पाती में महात्मा गांधी के जीवनवृत्त, सिद्धांत, विचार तथा उनके जीवन प्रसंग की घटनाओं का संग्रह किया गया है. बापू की पाती पुस्तक में में बापू के जीवन से जुड़ी 45 कहानियां है.

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