LPG Cylinder Crisis: पटना जिले में घरेलू एलपीजी गैस (LPG) उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानियों और गैस एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है.
जिलाधिकारी के निर्देश पर पटना में एक विशेष जिला कन्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन (24×7) काम करेगा. अब किसी भी तरह की अनियमितता, जमाखोरी या सिलेंडर मिलने में देरी होने पर उपभोक्ता सीधे 0612-221910 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. शिकायत मिलते ही संबंधित गैस एजेंसी के खिलाफ तत्काल एक्शन लिया जाएगा.
तीन शिफ्ट के लिए ‘वार रूम’ तैयार
गैस से जुड़ी शिकायतों का निपटारा ताश के पत्तों की तरह तेजी से हो, इसके लिए नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों और कर्मियों की तीन अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है. डीएम ने स्पष्ट किया है कि हर पाली में एक मजिस्ट्रेट मौजूद रहेंगे, जो शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.
प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक शैलेन्द्र कुमार को प्रथम समूह ‘अ’ का नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है. यह टीम न केवल फोन कॉल सुनेगी, बल्कि गैस वितरण प्रणाली की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग भी करेगी.
जमाखोरी और ओवरचार्जिंग करने वालों की अब खैर नहीं
त्योहारों या विशेष अवसरों पर कुछ गैस एजेंसियां किल्लत पैदा कर कालाबाजारी शुरू कर देती हैं. पटना प्रशासन ने इस बार ऐसी संभावनाओं को पहले ही खत्म करने का प्लान बनाया है. कन्ट्रोल रूम के माध्यम से गैस एजेंसियों के नोडल अफसर के साथ सीधा समन्वय स्थापित किया गया है.
यदि कोई एजेंसी सिलेंडर के लिए निर्धारित दर से अधिक पैसे मांगती है या बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में टालमटोल करती है, तो मजिस्ट्रेट सीधे उस एजेंसी की जांच करेंगे. जमाखोरी करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने तक के निर्देश दिए गए हैं.
ग्राहक के लिए सुरक्षा कवच और त्वरित समाधान
जिला प्रशासन का यह कदम न केवल भ्रष्टाचार पर चोट है, बल्कि ग्राहक के लिए एक सुरक्षा कवच भी है. डीएम ने कहा कि एलपीजी एक अनिवार्य सेवा है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
यह कंट्रोल रूम सुनिश्चित करेगा कि पटना के शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के ग्राहक को बिना किसी बाधा के गैस की आपूर्ति हो. लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनिमितता को चुपचाप सहने के बजाय जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर का उपयोग करें, ताकि पारदर्शी व्यवस्था बनी रहे.
