नोरा फतेही के गाने सरके चुनर पर बैन, समझिए सरकार ने क्यों उठाया यह कदम

Sarke Chunri Teri Sarke : नोरा फतेही का गाना सरके चुनर तेरी सरके गाना जितनी तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हुआ, उतनी ही तेजी से इसपर विवाद भी शुरू हो गया है. अब सरकार ने इस विवाद में दखल देते हुए  केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोरा फतेही के गाने सरके चुनर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इसे सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है. आइए समझते हैं क्या है पूरा विवाद.

Sarke Chunri Teri Sarke : बाॅलीवुड में डबल मीनिंग के गानों का इतिहास रहा है, कई डबल मीनिंग गाने यहां बने और चर्चा में भी रहे. चोली के पीछे क्या है…, सात सहेलियां खड़ी–खड़ी सहित कई ऐसे गाने यहां बने जिन्हें डबल मीनिंग वाला बताया गया और उनपर प्रतिबंध की मांग भी उठी. अब कन्नड़ मूवी केडी: दि डेविल का गाना सरके चुनर तेरी सरके के लिरिक्स पर विवाद हो रहा है. 

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि गाने पर बैन लगा दिया गया है. हमें फ्रीडम ऑफ स्पीच है, लेकिन हमें इसका सही तरीके से उपयोग करना चाहिए. फ्रीडम ऑफ स्पीच पूरी तरह से नहीं हो सकती, यह समाज और संस्कृति के हिसाब से होती है. समाजवादी पार्टी के नेता आनंद भदौरिया ने इस मसले पर सरकार से सवाल पूछा था.

सरके चुनर तेरी सरके पर क्या है विवाद?

सरके चुनर तेरी सरके गाने के लिरिक्स पर घोर आपत्ति जताई जा रही है. कहा जा रहा है कि इस गाने के बोल बहुत ही अश्लील हैं और गाने को बहुत ही फूहड़ और उत्तेजक तरीके से पेश किया गया है. गाने के वायरल होने के बाद इसपर कई लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई. जिसके बाद इस गाने को लेकर सामाजिक, राजनीतिक और फिल्मी जगत में बहस छिड़ गई है. आपत्तियों के बाद गाने के हिंदी वर्जन को यूट्‌यूब से हटा दिया गया है, लेकिन कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम वर्जन अभी मौजूद है.

KD: The Devil मूवी एक पैन इंडिया प्रोजेक्ट है

KD: The Devil मूवी कन्नड़ भाषा में बन रही है और यह एक पैन इंडिया प्रोजेक्ट है, जो 30 अप्रैल को पूरे  देश में रिलीज होगी. इस फिल्म के डायरेक्टर प्रेम के हैं, उन्होंने ही इस गाने के लिरिक्स को लिखा है. हिंदी में अनुवाद रकीब आलम ने किया है. पूरे विवाद के बाद ऑल  इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने गाने पर बैन लगाने की मांग भी की है. एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह के गानों से निगेटिविटी फैलती है. वहीं फिल्म के डायरेक्टर प्रेम की पत्नी और अभिनेत्री रक्षिता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कहा है कि चोली के पीछे पर सवाल क्यों नहीं उठे थे, जो सरके चुनर पर आपत्ति की जा रही है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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