LPG Crisis: बिहार में रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. तेल कंपनियों ने बढ़ती मांग और आपूर्ति के दबाव को देखते हुए नए गैस कनेक्शन (NC) और डबल बॉटल कनेक्शन (DBC) जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी है.
अब साल भर में तय कोटे से ज्यादा सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग भी सिस्टम स्वीकार नहीं कर रहा है. सरकार के इस कड़े फैसले ने आम आदमी की रसोई का बजट और गणित दोनों बिगाड़ दिया है.
12 सिलेंडर के बाद नो बुकिंग
एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे बुरी खबर उनके सालाना कोटे को लेकर आई है. नए नियमों के मुताबिक, शहरी इलाकों में एक साल में अधिकतम 12 और ग्रामीण इलाकों में महज 8 सिलेंडर ही मिल सकेंगे.
पहले 12 सिलेंडर के बाद बिना सब्सिडी वाले रिफिल की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब सिस्टम में 12वीं बुकिंग के बाद ‘ब्रेक’ लग गया है. बिहार एलपीजी वितरक संघ के अनुसार, यह फैसला मौजूदा उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने के लिए लिया गया है ताकि वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा न जाए.
कनेक्शन ट्रांसफर पर ब्रेक
अगर आप नौकरी या किसी अन्य कारण से एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट हो रहे हैं, तो फिलहाल गैस कनेक्शन ट्रांसफर कराना मुमकिन नहीं होगा. तेल कंपनियों ने अंतरराज्यीय और अंतर-शहर ट्रांसफर की प्रक्रिया को अगले आदेश तक ठप कर दिया है.
एजेंसियों का कहना है कि प्राथमिकता केवल पुराने और सक्रिय उपभोक्ताओं को रिफिल देने की है.
पीएनजी है तो लौटाना होगा एलपीजी कनेक्शन
केंद्र सरकार ने ‘तरलीकृत पेट्रोलियम गैस संशोधन आदेश, 2026’ जारी कर एक और बड़ा झटका दिया है. अब जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का कनेक्शन लग चुका है, वे एलपीजी सिलेंडर नहीं रख पाएंगे. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब ऐसे उपभोक्ताओं को अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा.
बिहार में करीब एक लाख पीएनजी उपभोक्ता हैं, जिनमें अकेले पटना के 30 हजार लोग इस नियम की जद में आएंगे. सरकार का तर्क है कि इससे एलपीजी की कालाबाजारी रुकेगी और जरूरतमंदों को गैस मिल सकेगी.
कमर्शियल गैस सिलेंडर की बिक्री दोबारा शुरू कर दी गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को थोड़ी राहत मिली है.
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