लालू यादव के बर्थडे पर पढ़िए उनके कई मजेदार किस्से, जो आज भी लोगों को गुदगुदाते हैं

Lalu Yadav Birthday Special: बिहार की राजनीति में अपनी अलग शैली और बेबाक बयानों के लिए मशहूर लालू यादव के कई ऐसे किस्से हैं, जो आज भी लोगों को गुदगुदाते हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर पढ़िए संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक उनके कुछ सबसे दिलचस्प और चर्चित किस्से.

Lalu Yadav Birthday Special: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनका जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था. बिहार की राजनीति में लालू यादव एक ऐसा नाम हैं, जिनकी शैली, भाषण और हाजिरजवाबी आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है. उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जिन्हें लोग आज भी याद कर मुस्कुरा देते हैं.

जब संसद में पीएम बनने की इच्छा खुलकर बताई

यह किस्सा साल 2008 का है. उस समय केंद्र में यूपीए सरकार थी और लालू यादव रेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. 22 जुलाई 2008 को लोकसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने अपने खास अंदाज में प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर की थी.

भाषण के दौरान लालू यादव ने कहा था कि प्रधानमंत्री बनने की इच्छा किसे नहीं होती. उन्होंने कहा कि उनका भी मन पीएम बनने का करता है और दूसरे नेताओं का भी यही सपना होता है. लेकिन मुझे किसी तरह की जल्दबाजी नहीं है. बिना मेल बियाह, कनपट्टी ले सेनुर से कोई पीएम नहीं बनता.

अपने चुटीले अंदाज में उन्होंने कहा था कि बिना सही राजनीतिक परिस्थितियों के कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता. साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश में अभिजात्य वर्ग का जो वर्चस्व है, उसमें कोई दलित, पिछड़ा या फिर माइनारिटी का पीएम कैसे बन सकता है?

जार्ज फर्नांडीस पर भी ली थी मजेदार चुटकी

लालू यादव के भाषणों में राजनीतिक तंज और हास्य का मिश्रण हमेशा देखने को मिलता रहा है. रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने संसद में एक बार पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस पर भी मजेदार टिप्पणी की थी. उस दौरान एनडीए विपक्ष में था. भाषण के दौरान लालू यादव ने अटल बिहार वाजपेयी के शासनकाल में हुए पोखरण परमाणु विस्फोट पर सवाल उठाया.

जार्ज फर्नांडीस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि पता नहीं जार्ज साहब आज वहां क्यों बैठे हैं. हमें उन्होंने ही समाजवाद का पाठ पढ़ाया. टीवी पर हमने गुप्ता जी को सुना. वह कह रहे थे हमें रोटी चाहिए. लगता है कि बेचारे अभी तक भूखे हैं. रोटी आसमान से नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर से आएगा.

‘रोटी इंकलाब से नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर से आएगी’

उन्होंने अपने भोजपुरिया अंदाज में आगे कहा कि गुप्ता जी, रोटी इंकलाब जिंदाबाद से नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर से आएगा. एड़ी अलगा के भाषणबाजी करने से रोटी नहीं आने वाला है. इन्फ्रास्ट्रक्चर की जब भी बात आती है, कहीं मेधा पाटकर खड़ी हो जाती हैं, तो कहीं बहुगुणा जी अनशन करते हैं, कहीं एनजीओ आ जाते हैं. भाजपा का हाल पुतवो मीठ, भतरो मीठ जैसा है.

उन्होंने अपने खास ग्रामीण अंदाज में कई उदाहरण दिए और विपक्ष पर तंज भी कसा. यही शैली लालू यादव को दूसरे नेताओं से अलग पहचान दिलाती रही है.

अपने परिवार के साथ 79 वां जन्मदिन मनाते लालू यादव

आज भी चर्चा में रहते हैं लालू के भाषण

लालू यादव की राजनीति जितनी चर्चित रही, उतने ही मशहूर उनके भाषण भी रहे हैं. संसद हो या चुनावी मंच, उनकी बातों में हास्य, व्यंग्य और राजनीतिक संदेश का अनोखा मेल देखने को मिलता था. यही कारण है कि उनके कई पुराने भाषण और किस्से आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं.

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Published by: Abhinandan Pandey

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