किऊल नदी का घटा जलस्तर, किसानों को राहत

किऊल नदी के जलस्तर घटने से किसानों ने चैन की सांस ली है. किसान किऊल नदी व गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण काफी चिंतित नजर आ रहे थे

लखीसराय.

किऊल नदी के जलस्तर घटने से किसानों ने चैन की सांस ली है. किसान किऊल नदी व गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण काफी चिंतित नजर आ रहे थे. सबसे अधिक किसानों को किऊल नदी व गंगा किनारे लगाये गये फसल सोयाबीन की खेती की चिंता सता रही थी. किसान पशुओं के चारा का भी चिंता कर रहे थे. वहीं किसानों की मक्का की खेती बर्बाद न हो जाय, इसकी भी किसान काफी चिह्नित थे. किऊल नदी के पानी जहरीला होने के कारण मक्का की खेती को नुकसान पहुंचना तय माना जा रहा था, लेकिन नदी के जलस्तर घटने से अब लोगों को कोई खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. नदी के जलस्तर घटने से किसानों को अब 20 प्रतिशत तक ही नुकसान होने की संभावना है. कृषि उप निदेशक पौधा संरक्षण के रीमा कुमारी का कहना है कि किसान की खेत में नमी जब समाप्त हो जाये, उसके बाद किसान अपने खेतों को सिंचाई कर किसान कृषि विभाग से सलाह के अनुसार दवा का छिड़काव करें, जिससे किसानों के मक्का फसल में कम नुकसान होगा.

कुंदर बराज होने से किसानों को मिली है भारी राहत

कुंदर बराज बनने के बाद किऊल नदी में पानी के उफान को तुरंत शांत करने के लिए किसानों के लिए काफी लाभप्रद साबित हुआ है. कुंदर बराज द्वारा उतना ही क्यूसेक में पानी छोड़ा जाता है. किऊल नदी में पानी के कारण किसानों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचे किऊल नदी के सुखाड़ एवं बाढ़ में किसानों के लिए काफी लाभप्रद साबित होता है. किसान के खेतों में अगर सुखाड़ की बारी आती है तो हलसी, रामगढ़ चौक एवं चानन के नहरों में पानी छोड़ा जाता है. वहीं किऊल नदी में पानी बाढ़ का रूप ले लेता है तो कुंदर बराज को बंद कर दिया जाता है. जिससे कि लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है.

बोले किसान

रामचंद्रपुर किसान मारुतिनंदन सिंह उर्फ बमबम बाबू ने बताया कि किऊल नदी के जलस्तर बुधवार को बढ़ा है. वहीं गुरुवार को जलस्तर की में कमी आने के कारण किसानों को राहत की सांस मिली है. वलीपुर के किसान सहदेव सिंह ने बताया कि किऊल नदी का जलस्तर घटा है, लेकिन गंगा का जलस्तर अभी तक नहीं घटने के कारण किसान चिंतित है. किसान सलाहकार सह किसान नंदकिशोर निराला ने बताया कि किसानों के सोयाबीन की खेती में पानी नहीं प्रवेश किया है. मक्का की खेती में पानी प्रवेश किया है. मक्का का पौधा छोटा होने के कारण नुकसान पहुंच सकता है.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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