मॉनसून की शुरुआत होते ही इस टोले की एकमात्र कच्ची सड़क पूरी तरह से कीचड़ और गहरे जलजमाव वाले दलदल में तब्दील हो गई है. हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि ग्रामीणों का अपने घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा से तंग आकर अब आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दे डाली है.
मरीजों और स्कूली बच्चों की जिंदगी दांव पर
सड़क पर पसरे कीचड़ और जलजमाव के कारण सबसे भयावह स्थिति आपातकालीन समय में होती है:
- घंटों की देरी: गांव में सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस या अन्य चार पहिया वाहन टोले के भीतर नहीं आ पाते, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक ले जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है.
- हादसों का डर: रास्ते में अत्यधिक फिसलन होने के कारण रोजाना स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो रहे हैं. पूरी गली नरकीय स्थिति में तब्दील हो चुकी है.
चुनाव में मिलते हैं सिर्फ वादे, बाद में कोई नहीं लेता सुध
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में जब भी चुनाव आते हैं, तो तमाम राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि विकास और पक्की सड़क का लोकलुभावन वादा करके वोट ले जाते हैं. लेकिन चुनाव खत्म होते ही पांच साल तक कोई भी सुध लेने नहीं आता. ग्रामीणों ने कई बार लिखित रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखला आश्वासन ही हाथ लगा.
प्रशासन को चेतावनी: जल्द सड़क नहीं बनी तो होगा आंदोलन
गांव की इस बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर कुशवाहा टोला के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों में भारी आक्रोश है:
सरकार डिजिटल इंडिया और चकाचक सड़कों का दावा करती है, लेकिन हमारे कुशवाहा टोला के वार्ड नंबर-9 में आकर देखिए कि लोग किस तरह नरकीय जीवन जीने को विवश हैं. हम जिला प्रशासन और जिलाधिकारी (DM) से पुरजोर मांग करते हैं कि इस कच्ची सड़क का अविलंब पक्कीकरण कराया जाए. यदि बरसात के इस मौसम में तुरंत कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो हम सभी ग्रामीण प्रखंड कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. नेताजी सिर्फ वोट मांगने न आएं, बल्कि खुद इस कीचड़ में चलकर हमारी तकलीफ को देखें.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कम से कम तात्कालिक राहत के तौर पर सड़क पर ईंट के टुकड़े (राबिश) या मुरुम गिरवाया जाए ताकि राहगीरों और बच्चों का पैदल चलना सुरक्षित हो सके.
