बड़हिया. प्रखंड क्षेत्र के प्रतापपुर गांव स्थित मदन मोहन ठाकुरबाड़ी परिसर में शुक्रवार को गौ सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत एक विचार गोष्ठी व बैठक का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में साध्वी आचार्य भक्ति श्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति में गौवंश की भूमिका और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गाय को पूजनीय माना गया है और इसका महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्राचीन समय में आश्रमों और गुरुकुलों में ऋषि-मुनि गौपालन करते थे तथा यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होने वाली घी, दूध और दही जैसी सामग्रियां गौ से ही प्राप्त होती थीं. आचार्य भक्ति श्री ने कहा कि वेदों और प्राचीन ग्रंथों में गौ से मिलने वाले उत्पादों-दूध, गोबर और गोमूत्र के महत्व का उल्लेख मिलता है. वर्तमान समय में इन विषयों पर देश और विदेश में वैज्ञानिक स्तर पर शोध भी किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज के दौर में अधिक दूध उत्पादन के उद्देश्य से जर्सी नस्ल की गायों का पालन बढ़ा है, जबकि देशी नस्ल की गायें प्रकृति और पर्यावरण के अधिक अनुकूल मानी जाती हैं. इसलिए देशी गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के लोगों को आगे आने की आवश्यकता है. इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि गौ संरक्षण को लेकर जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से 27 अप्रैल को बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा. इसके तहत हजारों लोगों के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन राज्य के सभी जिलों में अनुमंडल पदाधिकारियों को सौंपा जायेगा, जिसे आगे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक भेजा जायेगा. कार्यक्रम में चंदन कश्यप, स्वराज कुमार, नंदन कुमार, नवीन सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
देशी गाय के संरक्षण के लिए समाज को आगे आने की जरूरत : भक्तश्री
प्रखंड क्षेत्र के प्रतापपुर गांव स्थित मदन मोहन ठाकुरबाड़ी परिसर में शुक्रवार को गौ सम्मान आह्वान अभियान के अंतर्गत एक विचार गोष्ठी व बैठक का आयोजन किया गया
