मारपीट करने के मामले में छह आरोपी को तीन वर्ष की सजा

व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम राजन कुमार की कोर्ट ने वर्ष 2002 में दाखिल परिवाद वाद संख्या 303 सी/2002 व सेशन नंबर 628/08 में सुनवाई करते हुए आधा दर्जन लोगों को तीन वर्ष की सजा सुनायी है

लखीसराय. व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम राजन कुमार की कोर्ट ने वर्ष 2002 में दाखिल परिवाद वाद संख्या 303 सी/2002 व सेशन नंबर 628/08 में सुनवाई करते हुए आधा दर्जन लोगों को तीन वर्ष की सजा सुनायी है. इस संबंध में जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक हरेराम शर्मा ने बताया कि मामले में कोर्ट ने तेतरहाट निवासी रघुनाथ साव, उमेश साव, शंकर साव, मनोज साव, मकेश्वर साव एवं दिनेश साव को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनायी है. जिसमें आईपीसी की धारा 452/149 में तीन वर्ष की सजा व 10 हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया है. अर्थदंड नहीं दिये जाने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है. इसी तरह धारा 147 में दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गयी. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह अतिरिक्त सजा, धारा 323/149 में एक वर्ष की सजा व एक हजार रुपये अर्थदंड, नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा, धारा 341/149 में एक माह की सजा व पांच सौ रुपये अर्थदंड, नहीं देने पर सात दिन की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बताया कि सभी सजायें साथ साथ चलेगी. एपीपी श्री शर्मा ने बताया कि घटना के सूचक सह तेतरहाट निवासी स्व. राघो साव के पुत्र रामेश्वर साव के द्वारा दाखिल परिवाद वाद के अनुसार 15 सितंबर 2002 को उपरोक्त सभी आरोपी लोग एकाएक उनके घर में घुस गये, सूचक के पुत्र कामेश्वर साव को पिस्टल के बट से मारकर जख्मी कर दिया. उसी समय अधिवक्ता परमानंद साव के भाई जान से मारने की नियत से अपहरण कर ले जाने लगे. शोरगुल सुनकर जब आसपास के लोग दौड़े तो सभी उसे छोड़कर किऊल नदी की ओर भाग गये. मामले में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए अलग-अलग धाराओं पर विचार के उपरांत उपरोक्त धाराओं में सजा सुनायी. मामले में बहस के दौरान अभियोजन पक्ष से एपीपी हरेराम शर्मा व बचाव पक्ष से वरीय अधिवक्ता सुरेश प्रसाद सिंह उर्फ शशि बाबू व गिरीश कुमार सिन्हा पैरवी कर रहे थे.

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