पीरीबाजार क्षेत्र में लंबे समय से फल-फूल रहे अवैध आरा मिलों के काले कारोबार पर अब जिला प्रशासन और वन विभाग ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है. सरकारी तंत्र की चुप्पी का फायदा उठाकर माफिया न केवल जंगलों का सीना चीर रहे हैं, बल्कि लाखों के फर्नीचर कारोबार के जरिये राजस्व को भारी चूना भी लगा रहे हैं. बता दें कि क्षेत्र में अवैध आरा मिलों के संचालन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गयी है. स्थानीय फॉरेस्टर अनुभव कुमार के अनुसार, पीरी बाजार में चल रहे इस अवैध खेल की विस्तृत जानकारी रेंजर को दे दी गयी है. उन्होंने बताया कि एसपी से पुलिस फोर्स भी मांगी गयी है. वन विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम जल्द ही चिन्हित ठिकानों पर छापेमारी कर मशीनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगी. वन विभाग के अधिकारियों ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि आरा मशीन चलाने के लिए वैध लाइसेंस का होना अनिवार्य है. अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी संचालक ने लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया है, तो उसे तब तक संचालन की अनुमति नहीं है जब तक उसका लाइसेंस स्वीकृत न हो जाय. बिना लाइसेंस के आरा मील का संचालन कानूनन अपराध हैं. लोगों का कहना है कि आखिर इतने लंबे समय तक पुलिस और वन विभाग की नाक के नीचे ये मिलें कैसे चलती रहीं. क्या यह महज लापरवाही थी या मिलीभगत.
पीरी बाजार में अवैध आरा मिलों पर कार्रवाई की तैयारी में प्रशासन
क्षेत्र में लंबे समय से फल-फूल रहे अवैध आरा मिलों के काले कारोबार पर अब जिला प्रशासन और वन विभाग ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है
