सदर अस्पताल के एसएनसीयू में इलाज के दौरान नवजात की मौत

दोपहर 12:54 बजे सफलतापूर्वक नॉर्मल के दौरान स्वस्थ पुत्र के रूप में नवजात को जन्म दिया.

नवजात की मौत पर परिजन ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

डीएम, एसपी व कवैया थाना को आवेदन देकर जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

लखीसराय. सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में शुक्रवार को इलाज के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया है. परिजन वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मी पर नवजात के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने के साथ मामले की जांच व दोषी स्वास्थ्य कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए डीएम एवं एसपी कार्यालय के साथ कवैया थाना को लिखित आवेदन दिया है. वहीं एसएनसीयू वार्ड इंचार्ज डॉ विभूषण कुमार ने परिजन के आरोप को गलत बताया है. हालांकि परिजन की मांग पर नवजात की मौत मामले में जांच का आश्वासन भी दिया है. सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र के अलीनगर फेकू इंग्लिश गांव निवासी दीपक कुमार ने बताया कि गुरुवार की सुबह लगभग पांच बजे प्रसव पीड़ा के बाद 21 वर्षीय पत्नी श्वेता कुमारी को सूर्यगढ़ा सीएचसी में भर्ती कराया था. जहां दोपहर 12:54 बजे सफलतापूर्वक नॉर्मल के दौरान स्वस्थ पुत्र के रूप में नवजात को जन्म दिया. जच्चा बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे. दोपहर 2:30 बजे स्वास्थ्य कर्मी ने ऑक्सीजन की आवश्यकता बताते हुए नवजात को एसएनसीयू वार्ड जाने का सलाह दिया. स्वास्थ्य कर्मी के निर्देशानुसार शाम चार बजे नवजात को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया. दीपक ने बताया कि 10 बजे रात तक उनका बच्चा ठीक था. स्वास्थ्य कर्मी ने मां को बुलाकर नवजात को स्तनपान भी कराया. हालांकि इस दौरान उनके नवजात लगातार रो रहा था. सुबह पांच बजे वार्ड में भर्ती अन्य नवजात के परिजन से उन्हें जानकारी मिली कि उनके नवजात का मौत हो चुका है. जबकि स्वास्थ्य कर्मी ने जानकारी नहीं दिया. रात में ऑन ड्यूटी तैनात चिकित्सक व स्टाफ नर्स जिनके नाम से प्राथमिकी दर्ज करने का भी मांग किया है. उनका सीधा आरोप है कि ऑक्सीजन के अभाव में नवजात की मौत हुई है. रात में उनके बच्चे को ऑक्सीजन नहीं लगाया गया था, जिसके जिम्मेदार वार्ड में तैनात चिकित्सक व स्टाफ नर्स है. परिजन दोपहर एक बजे तक नवजात के शव के साथ एसएनसीयू वार्ड के बाहर ही बैठे रहे. इधर, वार्ड इंचार्ज डॉ विभूषण कुमार ने बताया कि नवजात की स्थिति काफी गंभीर थी. उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया गया. इलाज में किसी तरह के लापरवाही नहीं हुई है. फिर भी परिजन के आरोप के आलोक में मामले का जांच किया जायेगा.

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