सूर्यगढ़ा. बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (सेवांजलि) ने बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली 2019 में संशोधन कर कर्मचारी संगठनों को भी शिकायतकर्ता के रूप में मान्यता देने की मांग उठायी है. महासंघ के महामंत्री विकास कुमार ने मुख्य सचिव, बिहार सरकार को पत्र भेजा गया है. जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2019 में अधिसूचित शिकायत निवारण नियमावली का उद्देश्य सरकारी सेवकों व पेंशनभोगियों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना था. वर्तमान व्यवस्था में केवल व्यक्तिगत कर्मचारी, पदाधिकारी अथवा उनके आश्रितों को ही शिकायतकर्ता के रूप में मान्यता प्राप्त है. इसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाते हैं. महासंघ का तर्क है कि कर्मचारी संघ और महासंघ लगातार कर्मचारियों की समस्याओं को उठाते रहे हैं तथा कई मामलों में उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ता है. यदि नियमावली में कर्मचारी संगठनों को भी शिकायतकर्ता का दर्जा दिया जाए तो सामूहिक समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी हो सकेगी. इससे कर्मचारियों को न्यायालय की शरण लेने की आवश्यकता भी कम पड़ेगी तथा सरकार का समय और संसाधन दोनों बचेंगे. महासंघ ने मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली, 2019 में आवश्यक संशोधन कर संघ व महासंघ को शिकायतकर्ता के रूप में शामिल किया जाय, ताकि कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों की समस्याओं का त्वरित व सुगम समाधान सुनिश्चित हो सके.
सेवांजलि ने की शिकायत निवारण नियमावली में संशोधन की मांग
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (सेवांजलि) ने बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण नियमावली 2019 में संशोधन कर कर्मचारी संगठनों को भी शिकायतकर्ता के रूप में मान्यता देने की मांग उठायी है
