स्कूल प्रभारी पूनम कुमारी ने सीजेएम से की शिकायत

स्कूल प्रभारी पूनम कुमारी ने सीजेएम से की शिकायत

लखीसराय. जिले के शिक्षा विभाग का घोटाला की चर्चा लगातार होती रही है. जिसमें डीपीओ संजय कुमार द्वारा टाउन थाना में तीन प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी. हालांकि मामले में पुलिस द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी है. वहीं अब एक और मामला सामने आया है. जिसमें नवसृजित प्राथमिक विद्यालय नीमतर बिछवे मुसहरी की प्रभारी शिक्षिका पूनम कुमारी द्वारा न्यायालय में दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने डीइओ यदुवंश राम, डीपीओ संजय कुमार, सहायक अभियंता सुबोध कुमार, कनीय अभियंता अभय पाल, कार्यालय सहायक नीरज कुमार तथा संवेदक अमन ट्रेड्स के विरूद्ध पुलिस को जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है. प्रभारी पूनम कुमारी ने अपने परिवाद (संख्या 241/25) में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उपरोक्त अधिकारियों एवं संवेदक ने मिलकर विद्यालय के फर्जी मुहर व हस्ताक्षर का इस्तेमाल करते हुए संचिका तैयार की और बिना कोई कार्य किये सरकारी राशि की निकासी करने का प्रयत्न किया गया. मामले की जानकारी तब हुई, जब आरटीआई के तहत संचिका की प्रति हासिल कर उन्होंने डीएम, एसपी एवं शिक्षा विभाग को आवेदन दिया. हालांकि आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय डीपीओ संजय कुमार ने खुद पूनम कुमारी के विरूद्ध मामला दर्ज करा दिया. इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय की शरण ली, जहां से अब संबंधित आरोपियों पर जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश लखीसराय पुलिस को दिया गया है.

शिक्षा घोटाला मामले में लगातार हमलावर है भाकपा

मामले को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने भी कड़ा रूख अपनाया है. पार्टी के जिला कार्यकारिणी के सदस्य सह अधिवक्ता रजनीश कुमार ने आरोप लगाया कि जिले में आधा दर्जन विद्यालयों के प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर से योजनाओं की राशि की हेराफेरी का प्रयास किया गया, लेकिन दोषियों को बचाने के लिए उल्टे प्राचार्यों पर ही मुकदमा कर उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हिमांशु नामक एक व्यक्ति को बचाने के लिए सात सौ से अधिक योजनाओं की जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया है और चुनिंदा तरीके से ही कार्रवाई की जा रही है. रजनीश कुमार ने माफिया समूहों को संरक्षण देने का आरोप भी प्रशासन पर लगाया. उन्होंने कहा कि पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक किसी अभियंता, संवेदक या आरोपी प्राचार्य की गिरफ्तारी नहीं हुई है. सभी संबंधित अधिकारी और कर्मी अभी भी ड्यूटी पर कार्यरत हैं. आरोप है कि जिला प्रशासन सत्ता संरक्षित माफियाओं के आगे पूरी तरह नतमस्तक है और पुलिस भी अभियुक्तों को बचाने में सहयोग कर रही है.

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