जब तक है यह गगन में चंदा और सितारे, सलामत रहे तब तक माता-पिता हमारे: आजाद

प्रभात चौक स्थित एक होटल के सभागार में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन लखीसराय द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया.

जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के कवि गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की अपनी नवीनतम रचनाएं

फोटो संख्या 04-

लखीसराय. स्थानीय प्रभात चौक स्थित एक होटल के सभागार में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन लखीसराय द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता संगठन के उपाध्यक्ष सिद्धेश्वर सिंह कर रहे थे. जबकि संचालन देवेंद्र सिंह आजाद सचिव ने किया. कवि गोष्ठी में देवेंद्र सिंह आजाद की रचना ‘जब तक है यह गगन में चंदा और सितारे, सलामत रहे तब तक माता-पिता हमारे’ से कवि सम्मेलन का आगाज किया गया. जीवन पासवान की रचना, श्थाना के आंगन में किसी याचक का अनादर ना हो, नेता हो या जनता सब का एक समान आदर हो’. बलजीत कुमार की रचना, ‘सभी रिश्ते नाते रुपये पैसों से तोले जाते हैं’. अंकित सिंह वत्स की रचना, ‘शीत लहरी रे देह ठिठुरी’. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की रचना, ‘नव वर्ष आयेगा-उपलब्धियां का अंबार होगा’ गुलशन कुमार सिंह की रचना, ‘देश के लिए जीते हैं देश के लिए मरते हैं’. मुंद्रिका सिंह की रचना, ‘सारी दुनियां में आग लागल हो, खैर मानो यहां मोदी और योगी हो’. उदय शंकर कुमार की रचना, ‘हिंदी तो भारत की बिंदी है’. अरविंद कुमार भारती की रचना, ‘अपना हृदय के साफ करो, छोटका के गलती माफ करो’. प्रो मनोरंजन कुमार की रचना, ‘योग सभी को अपनाने में वक्त तो लगता है, जिसने योग अपनाया है स्वस्थ रहता है’. धन्यवाद ज्ञापन मुद्रिका प्रसाद सिंह ने किया. सभी आये हुए कविगण एवं साहित्यकारों ने नवनीत अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती, सचिव जीवन पासवान एवं अन्य पदाधिकारियों को नये सत्र के लिए शुभकामनाएं दी.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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