ग्रामीण कार्य विभाग की देखरेख में चल रहे इस सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्य में नियमों को किस कदर ताक पर रखा गया है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लाखों की योजना में जनता को यह जानने का हक भी नहीं दिया गया कि काम कब शुरू हुआ और कब खत्म होगा. मामले पर ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश के बीच अब कनीय अभियंता (JE) ने इसे संवेदक (ठेकेदार) की घोर लापरवाही मानते हुए अविलंब सुधार कराने का आश्वासन दिया है.
लगभग 71 लाख का बजट, पर कागजों में पारदर्शिता शून्य
मुख्य मार्ग पर लगाए गए आधिकारिक योजना बोर्ड के अनुसार, इस नवनिर्मित सड़क की कुल लंबाई 1.350 किलोमीटर है. विभाग द्वारा इसके निर्माण के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है:
- प्राक्कलित (निर्माण) लागत: ₹62,00,000 (62 लाख रुपये)
- संचालन एवं प्रबंधन (5 वर्ष) लागत: ₹9,31,000 (9.31 लाख रुपये)
- निगरानी विभाग: ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लखीसराय.
इतने बड़े बजट की योजना होने के बावजूद बोर्ड पर बने 'कार्य प्रारंभ की तिथि' और 'कार्य समाप्ति की तिथि' के कॉलम को जानबूझकर खाली छोड़ दिया गया है.
"काम खत्म होने के बाद लगता है बोर्ड, गुणवत्ता पर कैसे रखें नजर?"
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी सरकारी योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय सीमा का बोर्ड पर अंकित होना अनिवार्य है. ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
इस क्षेत्र में यह कोई पहली घटना नहीं है. ठेकेदार और विभागीय साठगांठ के कारण अक्सर जब निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त हो जाता है या आधा-अधूरा छोड़ दिया जाता है, तब जाकर खानापूर्ति के लिए बोर्ड टांगा जाता है. कई बार तो जानकारियां अधूरी ही छोड़ दी जाती हैं. तिथि न होने के कारण हम ग्रामीण न तो काम की समयसीमा पर नजर रख पाते हैं और न ही निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी कर पाते हैं.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और विभाग के वरीय पदाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाए और बोर्ड पर सभी अनिवार्य सूचनाएं अविलंब प्रदर्शित की जाएं.
कहते हैं कनीय अभियंता (JE) ब्रजेश कुमार
योजना बोर्ड पर अधूरी जानकारी और संवेदक की मनमानी को लेकर जब ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता से बात की गई, तो उन्होंने नियमों की अवहेलना की बात स्वीकार की:
"उक्त सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह से संपन्न नहीं हुआ है. सरकारी नियमानुसार, किसी भी निविदा (टेंडर) का काम धरातल पर शुरू होने से पहले ही कार्यस्थल पर प्राक्कलित राशि और समय सीमा के साथ पूर्ण विवरण का सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है. संवेदक द्वारा कार्य समाप्ति के बाद तिथि अंकित करने की बात सामने आई है, जो कि सरासर गलत और संवेदक की घोर लापरवाही है. इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संवेदक को आधिकारिक नोटिस जारी किया जा रहा है. बहुत जल्द बोर्ड पर कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की सही तिथि अंकित करा दी जाएगी." — ब्रजेश कुमार, कनीय अभियंता (ग्रामीण कार्य विभाग, लखीसराय)
इंजीनियर के आश्वासन के बाद अब देखना यह होगा कि विभाग कब तक संवेदक पर नकेल कसता है और बोर्ड पर गायब तारीखें कब तक अंकित की जाती हैं, ताकि सरकारी दावों में पारदर्शिता लौट सके.
