पीरीबाजार (लखीसराय) से रविराज आनंद की रिपोर्ट
Panchayat Sarkar Bhawan: लखीसराय जिले के पीरीबाजार थाना क्षेत्र की कस्बा पंचायत में पंचायत सरकार भवन नहीं बनने का मामला एक बार फिर चर्चा में है. पंचायत विकास दिवस पर आयोजित आमसभा सड़क किनारे करनी पड़ी, जिससे सरकार के पंचायत सशक्तीकरण के दावों पर सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए जल्द भवन निर्माण शुरू कराने की मांग की है.
सड़क पर आयोजित हुई पंचायत विकास दिवस की बैठक
प्रतिनिधि, पीरीबाजार. बिहार सरकार पंचायतों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और पंचायत सरकार भवन के माध्यम से ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने की बात करती है. इसके विपरीत पीरीबाजार थाना क्षेत्र की कस्बा पंचायत में पंचायत सरकार भवन के अभाव में पंचायत विकास दिवस के अवसर पर आयोजित ग्रामसभा सड़क किनारे आरपीएस काउंटर के बाहर आयोजित करनी पड़ी. तेज धूप में ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को बैठक करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
पांच वर्षों से भवन के बिना चल रहा पंचायत का काम
Panchayat Sarkar Bhawan: ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से पंचायत सरकार भवन नहीं होने के कारण ग्रामसभा, विकास योजनाओं की समीक्षा और अन्य प्रशासनिक बैठकों का आयोजन कभी सड़क पर तो कभी खुले मैदान में करना पड़ता है. इससे पंचायत की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है.
दिसंबर 2023 में जमीन चिह्नित, फिर भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सरकार भवन निर्माण के लिए 15 दिसंबर 2023 को जिला प्रशासन को सामूहिक आवेदन सौंपा गया था. भवन निर्माण के लिए जमीन भी चिह्नित कर दी गई थी. इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइल आगे नहीं बढ़ रही है, जिससे योजना अधर में लटकी हुई है.
जनप्रतिनिधियों पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर भी उदासीनता का आरोप लगाया. उनका कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने गंभीर पहल नहीं की. अब ग्रामीणों को जिला प्रशासन से ही उम्मीद है कि पंचायत सरकार भवन निर्माण की स्वीकृति देकर जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा.ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत सरकार भवन बनने से ग्रामीणों को एक स्थायी स्थान मिलेगा, जहां विकास योजनाओं की समीक्षा, सरकारी बैठकों और जनसुनवाई का बेहतर संचालन हो सकेगा.
