लखीसराय, मेदनीचौकी. ताजपुर पंचायत के शफीपुर भिड़हा मौजे में बाढ़ का पानी घुसने से करीब 10 एकड़ जमीन में लगी मकई की फसल डूब गई. झाना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी से सटे खेतों में पानी भर गया, जिससे किसानों की तैयार होती फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. फसल डूबने के बाद किसान आर्थिक नुकसान को लेकर चिंतित हैं और अब सरकार से राहत व मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
गोंदरी पुल के रास्ते झाना नदी में पहुंचा बाढ़ का पानी
भिड़हा के किसानों ने बताया कि गोंदरी पुल के रास्ते बाढ़ का पानी झाना नदी में पहुंच गया. इसके बाद नदी का जलस्तर बढ़ने लगा और आसपास के खेतों में पानी फैल गया. देखते ही देखते झाना नदी से सटे करीब 10 एकड़ खेतों में लगी मकई की फसल पानी में डूब गई. किसानों के अनुसार अचानक पानी बढ़ने से फसल को बचाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका.
डूबी फसल को पशुचारा के लिए काट रहे किसान
खेतों में पानी भरने के बाद मकई की फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है. कई किसान डूबी हुई फसल को पशुचारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए काटते नजर आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि फसल को बाजार में बेचकर जो आमदनी होने की उम्मीद थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो गई है. ऐसे में डूबी फसल को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करना ही उनके लिए एकमात्र विकल्प बचा है.
लागत पूंजी डूबने से किसानों की बढ़ी चिंता
फसल बर्बाद होने से किसानों की लागत पूंजी भी डूब गई है. किसानों ने बताया कि मकई की खेती में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई समेत कई मदों में खर्च किया गया था. फसल के डूब जाने से अब उस लागत की भरपाई भी मुश्किल नजर आ रही है.
मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे किसान
किसान राधिका रमन, आनंदी महतो, रामदेव महतो, मदन महतो, किशोर कुमार, रमोतार महतो, रत्न महतो, फूदो महतो, महेश महतो और कोकल महतो ने प्रशासन से फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कराकर सरकारी प्रावधान के तहत सहायता राशि उपलब्ध करायी जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से कुछ राहत मिल सके.
