पिछले तीन-चार दिनों से जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में हो रही लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति पैदा होने लगी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शुक्रवार को जोरदार बारिश के साथ-साथ उमस भरी गर्मी का सितम भी जारी रहेगा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. आपदा प्रबंधन विभाग ने खराब मौसम को देखते हुए लोगों से खुले मैदानों में न जाने की अपील की है.
ठनका का खतरा: पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील
मौसम विभाग द्वारा जारी तात्कालिक पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को पूरे दिन आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बादल गरजने और बिजली कड़कने की तीव्र संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की है:
- राहगीर और ग्रामीण किसी भी परिस्थिति में खुले आसमान के नीचे या खेतों में न रुकें.
- आंधी-पानी के दौरान ऊंचे पेड़ों, कच्चे मकानों और बिजली के खंभों/ट्रांसफार्मर के नीचे शरण बिल्कुल न लें.
- तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से जिले के कई फीडरों में बिजली कटौती (पावर कट) भी की जा सकती है.
तापमान का हाल: उमस से लोग रहेंगे परेशान
लगातार हो रही बारिश के बावजूद वातावरण में नमी की अधिकता के कारण लोगों को चिपचिपी और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा. शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. मौसम विभाग का कहना है कि मानसूनी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है, जिसके प्रभाव से आगामी 21 जुलाई को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और जिले के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा.
किसानों के लिए अलर्ट: फसलों पर दवाओं के छिड़काव से बचें
लगातार हो रहे जलजमाव और अत्यधिक नमी के कारण खेतों में लगी फसलों पर फंगल इन्फेक्शन (फफूंद जनित संक्रमण) का खतरा काफी बढ़ गया है. इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष हिदायत दी है:
इस अत्यधिक मानसूनी मौसम में किसान भाई अपनी फसलों पर किसी भी प्रकार के कीटनाशक, कवकनाशी (फंगीसाइड) या पोषक तत्वों का छिड़काव न करें. लगातार होने वाली बारिश के कारण दवाएं बह जाएंगी, जिससे धन का नुकसान होगा और पौधों को भी क्षति पहुंच सकती है. मौसम साफ होने का इंतजार करें.
निचले इलाकों के निवासियों को भी सतर्क रहने को कहा गया है ताकि अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति में वे सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट हो सकें.
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