लखीसराय में 79.2 प्रतिशत तक पहुंचा संस्थागत प्रसव, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से बढ़ा महिलाओं का जुड़ाव

बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है. NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार, संस्थागत प्रसव का अनुपात 81.1% तक पहुँच गया है, जबकि पहली तिमाही में ANC कराने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है. यह सुधार मां और नवजात दोनों की बेहतर देखभाल का संकेत देता है.

लखीसराय. जिले के साथ पूरे बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं से महिलाओं के जुड़ाव में सकारात्मक बदलाव सामने आया है. राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-6, एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में संस्थागत प्रसव का अनुपात 76.2 प्रतिशत से बढ़कर 81.1 प्रतिशत हो गया है. वहीं लखीसराय जिले में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 79.2 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. इससे पहले की तुलना में अधिक महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंच रही हैं.

पहली तिमाही में एएनसी कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी

गर्भावस्था के शुरुआती चरण में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बिहार में पहली तिमाही में एएनसी कराने वाली महिलाओं का अनुपात 52.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.9 प्रतिशत हो गया है.

वहीं गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी एएनसी सेवा से जुड़ने वाली महिलाओं का कवरेज 81.6 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इससे गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच तक महिलाओं की पहुंच में सुधार का संकेत मिलता है.

प्रसव के बाद मां और नवजात की देखभाल में भी सुधार

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर प्रसव के बाद की देखभाल में भी दिखाई दे रहा है. बिहार में प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को प्रसवोत्तर देखभाल मिलने का अनुपात 57.3 प्रतिशत से बढ़कर 69.9 प्रतिशत हो गया है.

इसी अवधि में नवजात शिशुओं को प्रसव के बाद आवश्यक देखभाल मिलने का अनुपात 59.3 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गया है. यह आंकड़ा प्रसव के साथ-साथ मां और नवजात की देखभाल की पहुंच में सुधार को दर्शाता है.

गर्भावस्था से प्रसव तक निरंतर जुड़ाव जरूरी

पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि परिमल झा ने बताया कि इन आंकड़ों को केवल प्रसव के आंकड़ों के रूप में देखने के बजाय गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक स्वास्थ्य सेवाओं से महिला के निरंतर जुड़ाव के रूप में देखना महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि शुरुआती एएनसी, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल में एक साथ सुधार मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता मजबूत होने का संकेत देता है.

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की बनी अहम भूमिका

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.

राज्य में 57.5 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं. ग्रामीण बिहार में यह अनुपात 58.4 प्रतिशत है. वहीं लखीसराय जिले में 54 प्रतिशत प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हुए हैं.

यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं. संस्थागत प्रसव के माध्यम से महिलाओं को प्रसव के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने का अवसर बढ़ा है.

गर्भावस्था से पहले भी दिख रहा सकारात्मक बदलाव

मातृ स्वास्थ्य में सुधार की तस्वीर गर्भावस्था से पहले होने वाले सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी बदलावों से भी जुड़ी है. एनएफएचएस-6 के अनुसार 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत हो गया है.

कम उम्र में विवाह के मामलों में कमी को किशोरियों और महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

अब पूरी देखभाल की निरंतरता मजबूत करना अगला लक्ष्य

बिहार में महिलाओं को स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रगति हुई है. अब इस जुड़ाव को पूरी गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद की अवधि तक निरंतर बनाए रखना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा.

नियमित एएनसी, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल के साथ किशोरियों के स्वास्थ्य, बेहतर पोषण, परिवार नियोजन और गर्भधारण के बीच उचित अंतराल पर ध्यान देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सकता है.

एनएफएचएस-6 के आंकड़े बिहार में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच और उपयोग की तस्वीर सामने रखते हैं. आगे की चुनौती हर महिला तक सही समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करना है.

प्रमुख आंकड़े

  • बिहार में संस्थागत प्रसव : 76.2 प्रतिशत से बढ़कर 81.1 प्रतिशत
  • लखीसराय में संस्थागत प्रसव : 79.2 प्रतिशत
  • पहली तिमाही में एएनसी : 52.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.9 प्रतिशत
  • किसी न किसी एएनसी सेवा का कवरेज : 81.6 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत
  • दो दिनों के भीतर माताओं की प्रसवोत्तर देखभाल : 57.3 प्रतिशत से बढ़कर 69.9 प्रतिशत
  • नवजात की प्रसवोत्तर देखभाल : 59.3 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत
  • सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव : बिहार में 57.5 प्रतिशत
  • ग्रामीण बिहार में सरकारी संस्थानों में प्रसव : 58.4 प्रतिशत
  • लखीसराय में सरकारी संस्थानों में प्रसव : 54 प्रतिशत

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लेखक के बारे में

By राजेश कुमार

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