लखीसराय में सड़क बनी नाला, सालभर गंदे पानी और कीचड़ में जीने को मजबूर ग्रामीण

Lakhisarai Ground Report: लखीसराय में घोघी गांव में जलजमाव से बदहाल जिंदगी, बीमारियों का बढ़ा खतरा

Lakhisarai Ground Report: पीरी बाजार (लखीसराय) से रविराज आनंद की रिपोर्ट: लखीसराय जिले के पीरी बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत चौरा राजपुर पंचायत के घोघी गांव में विकास के सरकारी दावे जमीनी हकीकत के सामने पूरी तरह बौने नजर आ रहे हैं. गांव के वार्ड नंबर-11 की मुख्य सड़क पिछले कई वर्षों से नाले में तब्दील हो चुकी है. सड़क पर सालभर गंदा पानी और कीचड़ जमा रहने से ग्रामीणों का जीवन नारकीय बन गया है. लोगों का कहना है कि यहां से गुजरना अब किसी सजा से कम नहीं रह गया है.

अवैध अतिक्रमण से बढ़ी समस्या

ग्रामीणों के अनुसार गांव के मुख्य नाले पर हुए अवैध अतिक्रमण के कारण जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गयी है. नतीजा यह है कि घरों और नालियों का गंदा पानी लगातार सड़क पर बहता रहता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल बारिश के मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि साल के बारहों महीने सड़क पर जलजमाव बना रहता है. कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है.

बच्चों और मरीजों की बढ़ी परेशानी

गांव की यही सड़क बाजार, अस्पताल और स्कूल जाने का मुख्य रास्ता है. रोजाना स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को इसी गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है.

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को होती है. कई बार मरीजों को इसी दूषित पानी के बीच से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है.

बीमारी फैलने का डर

लगातार जलजमाव और गंदगी के कारण गांव में मच्छरों और कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है. लोगों में त्वचा रोग, मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगायी गुहार

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से नाले पर हुए अतिक्रमण को हटाने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और सड़क का पक्कीकरण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक नाले की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गांव के लोग इसी तरह नारकीय हालात में जीने को मजबूर रहेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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