बच्चों को साइबर सेफ्टी से संबंधित दी गयी महत्वपूर्ण जानकारी

प्रसिद्ध बालिका विद्यापीठ स्कूल में सीबीएसई द्वारा संचालित सोशल मीडिया अभियान “नो टू यूज मोबाइल फोन” के अंतर्गत गुरुवार को एक विशेष साइबर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

टाउन थाना के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक

लखीसराय. प्रसिद्ध बालिका विद्यापीठ स्कूल में सीबीएसई द्वारा संचालित सोशल मीडिया अभियान “नो टू यूज मोबाइल फोन” के अंतर्गत गुरुवार को एक विशेष साइबर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम लखीसराय टाउन थाना से पधारे अधिकारियों के सौजन्य से संपन्न हुआ. कार्यक्रम में बाल भवन एवं विद्यालय भवन के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण तथा शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल हुए. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराध, सोशल मीडिया के दुरुपयोग एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था. कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में विद्यालय की हिंदी शिक्षिका ज्योति झा द्वारा विद्यार्थियों को “रूढ़ियों से मुक्त व्यवहार एवं आपसी सम्मान” विषय पर संबोधित किया गया. उन्होंने बताया कि किस प्रकार रूढ़िवादी सोच बच्चों के व्यक्तित्व विकास और भविष्य निर्माण में बाधा उत्पन्न करती है तथा समानता, सम्मान और सकारात्मक दृष्टिकोण ही एक सुरक्षित समाज की नींव है. जिसके उपरांत तत्पश्चात टाउन थाना से पधारे पुलिस अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया अभियान “नो टू यूज मोबाइल फोन” के अंतर्गत बच्चों को साइबर सेफ्टी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गयी. महिला सब-इंस्पेक्टर फरीन खानम ने विशेष रूप से छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करना किस प्रकार भविष्य में गंभीर अपराध का कारण बन सकता है. उन्होंने पॉक्सो एक्ट के बारे में जानकारी देते हुए छात्राओं को यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि वे किसी भी स्थान पर असुरक्षित महसूस करें या कोई उन्हें परेशान करे, तो वे बिना डर के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल करें या अपने नजदीकी थाना में जाकर तुरंत सहायता प्राप्त करें. सब-इंस्पेक्टर राजकुमार राम ने लड़के एवं लड़कियों दोनों को समझाते हुए बताया कि छात्राएं अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड न करें तथा छात्र गेम खेलने के दौरान किसी भी ऐप द्वारा मांगी जा रही अनावश्यक स्वीकृति को बिना सोचे-समझे साक्षा न करें. इससे मोबाइल का महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंच जाता है, जिसका उपयोग आगे चलकर ब्लैकमेलिंग एवं आर्थिक ठगी के लिए किया जाता है. सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद तैयब ने विद्यार्थियों के साथ वास्तविक केस स्टडी साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार बच्चे अनजाने में साइबर अपराध का शिकार बनते हैं. उन्होंने सलाह दी कि आवश्यकता होने पर स्मार्टफोन की बजाय कीपैड मोबाइल का उपयोग अधिक सुरक्षित है तथा किसी भी प्रकार की निजी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें. कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है. विद्यालय की प्राचार्या कविता सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी कारणवश मोबाइल का उपयोग आवश्यक हो, तो बच्चों को नियंत्रित एवं सीमित उपयोग करना चाहिए. बच्चों की सुरक्षा एवं मानसिक विकास सर्वोपरि है.

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