लखीसराय का एकमात्र नवोदय विद्यालय बाढ़ में डूबा: परिसर में भरा 4 फीट पानी; 466 बच्चों की छुट्टी, 17 सितंबर तक बंद

टाल क्षेत्र में बाढ़ का पानी जवाहर नवोदय विद्यालय में घुस गया है, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह बंद है. सुरक्षा को देखते हुए 466 छात्र-छात्राओं को घर भेज दिया गया है और स्कूल को 17 सितंबर तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. स्थानीय लोगों ने स्थायी समाधान की मांग की है.

लखीसराय, बड़हिया. टाल क्षेत्र में नदियों के उफान के कारण बड़हिया स्थित जिले का एकमात्र जवाहर नवोदय विद्यालय एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आ गया है. विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है. पानी और बिजली व्यवस्था प्रभावित होने के कारण विद्यालय के निचले तल का कामकाज भी बाधित है. बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने विद्यालय में अध्ययनरत सभी 466 बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया है. इनमें 197 छात्राएं शामिल हैं. विद्यालय को 17 सितंबर तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.

हर साल ग्राउंड फ्लोर में भर जाता है तीन से चार फीट पानी

प्राप्त जानकारी के अनुसार टाल क्षेत्र में बाढ़ के दौरान हर साल जवाहर नवोदय विद्यालय परिसर में पानी पहुंच जाता है. कई बार विद्यालय के ग्राउंड फ्लोर स्थित कमरों में तीन से चार फीट तक पानी भर जाता है. इस बार भी निचले तल में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. पानी भरने के कारण निचले तल के कमरों में रखे सामान और दैनिक कामकाज प्रभावित हुए हैं. बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से विद्यालय प्रशासन के सामने अतिरिक्त परेशानी खड़ी हो गयी है.

नवोदय विद्यालय में फैला बाढ़ का पानी | Prabhat Khabar Network

466 बच्चों को भेजा गया सुरक्षित घर

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विद्यालय में अध्ययनरत सभी 466 छात्र-छात्राओं को सुरक्षित घर भेज दिया गया है. इनमें 197 छात्राएं हैं. प्रशासन और विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालय को 17 सितंबर तक अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है. विद्यालय में करीब 35 से 37 शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं. विद्यालय बंद रहने के दौरान बाढ़ की स्थिति और परिसर में पानी के स्तर पर नजर रखी जाएगी.

2021 में भी जलमग्न हुआ था विद्यालय

स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय के बाढ़ की चपेट में आने की यह पहली घटना नहीं है. वर्ष 2021 में भी विद्यालय परिसर जलमग्न हो गया था. हर साल बाढ़ के दौरान विद्यालय प्रशासन को जनरेटर चलाने, सामान को ऊपरी मंजिल पर पहुंचाने और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सामने आ रही समस्या के बावजूद विद्यालय को बाढ़ से स्थायी रूप से सुरक्षित करने की दिशा में ठोस समाधान नहीं हो पाया है.

भवन निर्माण पर भी उठ रहे सवाल

बाढ़ की इस स्थिति ने विद्यालय भवन और परिसर के निर्माण को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़हिया का टाल क्षेत्र बाढ़ प्रभावित माना जाता है, ऐसे में भवन निर्माण के समय फ्लड लेवल और भविष्य में जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखकर परिसर की ऊंचाई निर्धारित की जानी चाहिए थी. लोगों का सवाल है कि जब हर साल बाढ़ के दौरान विद्यालय के डूबने की आशंका रहती है तो भवन और परिसर को अपेक्षाकृत ऊंचा बनाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी.

हर साल पढ़ाई होती है प्रभावित, स्थायी समाधान की मांग

जवाहर नवोदय विद्यालय में बार-बार बाढ़ का पानी पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. विद्यालय बंद होने के साथ शैक्षणिक गतिविधियां भी रुक जाती हैं. स्थानीय लोगों ने विद्यालय को बाढ़ से स्थायी रूप से सुरक्षित करने के लिए ठोस उपाय किए जाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी पढ़ाई भी प्रभावित न हो, इसके लिए विद्यालय परिसर की ऊंचाई बढ़ाने, जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था करने और बाढ़ के पानी से बचाव के स्थायी उपाय किए जाने की जरूरत है.

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By Prabhat khabar news desk

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