शोधकर्ताओं ने उरैन पहाड़ी पर उकेरी वरमी अभिलेखों को देखा, लिया फोटो
कजरा. क्षेत्र अंतर्गत उरैन पहाड़ी जहां वर्ष 2016-17 व 2017-18 में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई का कार्य किया गया था. जहां दो वर्ष तक खुदाई का कार्य चला. इस दौरान यहां भगवान बुद्ध के आने के कई सारे प्रमाण मिलने की बात कही गयी थी. वहीं इसे लेकर सोमवार को अमेरिका स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में कला इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर रॉव लिनरोथ, आइआइटी गुवाहटी से पुरातत्वविद् ईशान हरित व दिल्ली आर्ट गैलरी की कला इतिहासकार सुष्मिता नंदिनी द्वारा उरैन पहाड़ी पहुंचकर वहां पहाड़ी पर बुद्ध के पैरों के निशान, बौद्धिष्ठों के बैठक मुद्रा के चित्र के साथ-साथ वरमी अभिलेख को देखा व फोटो लिया. इतना ही नहीं इनलोगों ने वर्मी में लिखे शब्दों के बारे में आपस में चर्चा भी की. साथ ही उरैन पहाड़ी पर मन्नत स्तूप होने का भी विश्लेषण किया. इन लोगों ने पहाड़ पर एक घंटा समय दिया. जिसमें पूरे पहाड़ पर उकेरे गये नक्काशी व लेख को देख चर्चा की.उरैन पहाड़ी पर बने स्तूप की नक्काशी इस क्षेत्र की मध्ययुगीन समय की संस्कृति को आसानी से समझा जा सकता है. यह नक्काशी पूर्वी बिहार में बौद्ध कला और वास्तुकला की खास शैली को दिखाती है.
रॉव लिनरोथ, एसोसिएट प्रोफेसर, कला इतिहास विभाग, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी
यहां मिली कलाकृतियां व अवशेष से साफ पता चलता है कि उस समय बौद्ध धर्म समाज में मौजूद था.ईशान हरित, पुरातत्वविद्, आइआइटी गुवाहाटी
यहां बौद्ध धर्म का होना तो साफ दिख रहा है. साथ ही उस समय यहां के लोगों पर इसका अच्छा प्रभाव रहा होगा. इतनी बड़ी मात्रा में यहां पहाड़ों पर बने नक्काशी यह साफ-साफ दर्शाता है.सुष्मिता नंदनी, कला इतिहासकार, दिल्ली आर्ट गैलरीB
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