लखीसराय में 142 सालों से आस्था का केंद्र बना रेलवे परिसर का मां काली मंदिर

Aaj Ka Darshan: लखीसराय) में रेलवे निर्माण में आ रही थीं बाधाएं, मां काली की पूजा के बाद बदल गई तस्वीर

Aaj Ka Darshan: कजरा (लखीसराय) से सुनील कुमार की रिपोर्ट, लखीसराय जिले के कजरा रेलवे स्टेशन परिसर स्थित मां काली मंदिर पिछले 142 वर्षों से लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. रेलवे परिसर में स्थित यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके की सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है. हर वर्ष यहां आयोजित होने वाली भव्य काली पूजा और मेला दूर-दराज के गांवों तक आकर्षण का केंद्र रहता है. पूजा के दौरान पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब जाता है और हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

रेलवे निर्माण के दौरान शुरू हुई थी पूजा की परंपरा

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार कजरा रेलवे परिसर में मां काली की पूजा की शुरुआत वर्ष 1884 में हुई थी. उस समय रेलवे लाइन और स्टेशन निर्माण का कार्य चल रहा था, लेकिन काम में लगातार बाधाएं आ रही थीं. मजदूरों और अधिकारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.

बताया जाता है कि उसी दौरान बंगाल से आए एक रेलकर्मी ने मां काली की आराधना करने का सुझाव दिया. इसके बाद रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से परिसर में मां काली की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू की गयी.

पूजा के बाद बदल गया माहौल

स्थानीय लोगों का कहना है कि मां काली की पूजा शुरू होने के बाद निर्माण कार्य में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो गयीं और रेलवे का काम तेजी से आगे बढ़ने लगा. तभी से यहां हर वर्ष धूमधाम से काली पूजा आयोजित की जाती है और यह परंपरा आज भी लगातार जारी है.

समय के साथ यह पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि इलाके के लोगों की भावनाओं और विश्वास का हिस्सा बन गयी. श्रद्धालुओं का मानना है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मुराद जरूर पूरी होती है.

मेले में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

कजरा, पीरी बाजार, सूर्यगढ़ा और आसपास के कई इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. पूजा के दौरान लगने वाला मेला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है. मेले में झूले, खिलौने, मिठाइयों और पूजा सामग्री की दुकानें सजती हैं.

श्री श्री 108 आदर्श काली पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि पूजा को सफल बनाने में रेलवे कर्मियों और ग्रामीणों की बड़ी भूमिका रहती है. कई दिन पहले से मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है.

Also Read: एलपीजी गैस सब्सिडी को लेकर आया नया नियम, आधार वेरिफिकेशन नहीं कराया तो बंद होगी सब्सिडी, जानें लास्ट डेट

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >