उन्होंने कहा कि पूर्व में आदिवासी समुदाय के लोग जिला के तत्कालीन एसपी राजीव मिश्र के पास भी जंगल से बाहर रहने की व्यवस्था करने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने एक कंबल और खाने का सामान देते हुए आश्वासन दिया था कि निदरेष को परेशान नहीं किया जायेगा. लेकिन पुलिस बार-बार निदरेष को पकड़ कर हमें परेशान करती रहती है. बिनो देवी ने कहा कि ये लोग बाहर में पढ़ता है हाल ही में परीक्षा देकर गांव आया और पुलिस ने शौच जाने के क्रम में पकड़ कर थाना ले आयी.
आदिवासियों ने थाने को घेरा
लखीसराय: गुरुवार की अहले सुबह कजरा थाना पुलिस के नेतृत्व में सीआरपीएफ, एसटीएफ व बीएमपी के जवानों के द्वारा नक्सलियों की टोह में सर्च अभियान चलाया गया. सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने कजरा थाना के कानीमोह गांव के समीप टहल रहे दो आदिवासी युवक को संदेह होने पर हिरासत में लेकर थाना ले आयी. […]

लखीसराय: गुरुवार की अहले सुबह कजरा थाना पुलिस के नेतृत्व में सीआरपीएफ, एसटीएफ व बीएमपी के जवानों के द्वारा नक्सलियों की टोह में सर्च अभियान चलाया गया. सर्च अभियान के दौरान पुलिस ने कजरा थाना के कानीमोह गांव के समीप टहल रहे दो आदिवासी युवक को संदेह होने पर हिरासत में लेकर थाना ले आयी.
पुलिस के द्वारा युवक को पकड़ने की जानकारी मिलते ही कानीमोह के आदिवासी समुदाय के दर्जनों महिला-पुरुष दोनों युवक की मां के साथ कजरा थाना पहुंच गये व युवक को छोड़ने की मांग करते हुए थाना पर हंगामा करने लगे. कजरा पुलिस व स्थानीय चौकीदार के समझाने पर ग्रामीणों ने थानाध्यक्ष के आने तक शांत रहने का आश्वासन दिया और थाना के अंदर ही एक पेड़ के नीचे बैठ गये. घटना क े संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने सर्च अभियान के दौरान कानीमोह निवासी अजरुन कोड़ा के 22 वर्षीय पुत्र टिंकू कुमार और स्व महेंद्र कोड़ा के 23 वर्षीय पुत्र सुबोध कोड़ा को नक्सली होने के संदेह पर हिरासत में लिया गया. जिसकी जानकारी होने पर सुबोध की मां कविता देवी और टिंकू की मां बिनो देवी के नेतृत्व में रिंकू देवी, एतवारी देवी, खीरीया देवी, बेबी देवी, मुन्नी देवी सहित दर्जनों महिला व पुरुष थाना आकर युवक को निदरेष बताते हुए छोड़ने की मांग करने लगे. इस संबंध में हिरासत में लिये गये युवक टिंकू ने बताया कि सुबह में वह गांव के समीप खेत में शौच करने जा रहे थे, तभी सर्च अभियान चला रही पुलिस ने उसे बुला कर पूछताछ करते हुए गाड़ी में बैठने को कहा. वहीं सुबोध कोड़ा ने बताया कि सुबह में गाय को बाहर निकालने के लिए बथान जा रहे थे कि पुलिस ने पकड़ कर वाहन में बैठा लिया और थाना ले आयी. वहीं ग्रामीण संतोषी कोड़ा ने बताया कि आदिवासी समुदाय के लोग दोनों तरफ से पिस रहे हैं. नक्सली उन्हें पुलिस के मुखबिर समझ कर बेवजह तंग करती है तो पुलिस नक्सली कह कर परेशान करती है.
क्या बोले अधिकारी
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने इस घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जतायी.